फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शोध : छोटी पुतली के ऑपरेशन में ‘पुश एंड पुल’ विधि बेहद कारगर, एमडीआई में हो रहा सफल ऑपरेशन

Fri, 19 Apr 2024 02:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

सर्जरी के बाद देखा गया है कि अधिकतर मामलों में पुतली कमजोर हो जाती है। इस वजह से देखने की शक्ति और पुतली की बनावट प्रभावित होती है। इस कारण पुतली रोशनी का सामना करने में सक्षम नहीं रह पाती है।
विज्ञापन
eye Health - फोटो : istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अब छोटी पुतली में बेहद मामूली चीरा लगाकर मोतियाबिंद की सर्जरी की जा सकेगी। इसमें पुतली को किसी प्रकार को जोखिम नहीं होगा। इसको ‘पुश एंड पुल’ विधि कहते हैंं। मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय के वरिष्ठ प्रो. डॉ. एसपी सिंह, डॉ. अरुण कुमार सिह, डॉ. चंद्र प्रकाश ओली और डॉ. क्षमा द्विवेदी ने इस विधि पर शोध किया। यह शोध नेत्र रोग विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

विज्ञापन


डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक इस विधि से एमडीआई में वह सैकड़ों सफल ऑपरेशन कर चुके हैं। अभी तक चार विधियों से छोटी पुतली में मोतियाबिंद की सर्जरी की जाती है। जिसमें सिंटेकियोलिसिस, मैकेनिकल स्ट्रेचिंग, कटिंग विधि और आईरिस रिट्रेक्शन विधि शामिल है। इन सभी तकनीकी से पुतली को जोखिम रहता है। जिसमें पुतली के फटने, रक्तस्राव, आईरिस की क्षति, पीछे के कैप्सूल के फटने और लेंस के नष्ट होने का खतरा बना रहता है।

सर्जरी के बाद देखा गया है कि अधिकतर मामलों में पुतली कमजोर हो जाती है। इस वजह से देखने की शक्ति और पुतली की बनावट प्रभावित होती है। इस कारण पुतली रोशनी का सामना करने में सक्षम नहीं रह पाती है। वहीं, पुश एंड पुल विधि से की गई सर्जरी के परिणाम सकारात्मक देखने को मिले हैं। जिसमें छोटी पुतली में छोटा चीरा लगाकर हल्के धक्के से लेंस को बाहर निकाला जाता है। इस विधि से सर्जरी करने पर पुतली के फटने की संभावना न के बराबर रहती है। सर्जरी के बाद पुतली में अनियमित फैलाव नहीं होता और वह चकाचौंध में भी सुरक्षित रहती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सर्जरी में दो उपकरणों का होता है उपयोग

इस विधि में दो उपकरणों का उपयोग किया जाता है। जिसमें सिंस्की हुक और आईरिस रिपोजिटर या साइक्लो डायलिसिस स्पैटुला शामिल हैं। पुश एंड पुल विधि से कई देशों में सर्जरी की जा रही है। डॉ. एसपी सिंह ने इस शोध को 13 व 14 अप्रैल को नेपाल में हुई इंडो नेपाल फ्रेंडशिप इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में भी प्रस्तुति किया था।

अक्सर छोटी पुतली में मोतियाबिंद का ऑपरेशन जटिल होता है। इसमें पुतली को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहा है। इसके अलावा लेंस भी प्रभावित हो सकता है। पुश एंड पुल विधि से की गई सर्जरी के परिणाम सकारात्मक देखने को मिले हैं। - डॉ. एसपी सिंह, प्रोफेसर, मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय प्रयागराज। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें