पीसीएस मुख्य परीक्षा में एक अभ्यर्थी की कॉपी बदले जाने के मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के समीक्षा अधिकारी (आरओ) वीरेंद्र सिंह और सहायक समीक्षा अधिकारी (एसआरओ) सुशील कुमार पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने गलत कोडिंग कर दी थी, जिसकी वजह से कॉपी बदल गई। मामला सामने आने के बाद अब लोक सेवा आयोग में कोडिंग प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। आयोग में अब बार कोड व्यवस्था लागू किए जाने पर विचार हो रहा है।
पीसीएस परीक्षा-2015 की अभ्यर्थी रहीं सुहासिनी बाजपेयी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मुख्य परीक्षा में उनकी कॉपी किसी दूसरे अभ्यर्थी से बदल दी गई, जिसकी वजह से उनके अंक काफी कम हो गए और वह इंटरव्यू के लिए चयनित नहीं हो सकीं। लोक सेवा आयोग की ओर से कराई गई जांच में मामला सही पाया गया। जांच में यह बात सामने आई कि गलत कोडिंग के जरिये सुहासिनी की कॉपी किसी दूसरे अभ्यर्थी की कॉपी से बदल दी गई। बाद में सुहासिनी की कॉपी की दोबारा जांच हुई तो मेरिट में उनका नाम आ गया। उन्होंने इंटरव्यू भी दिया लेकिन साक्षात्कार में कम अंक मिलने के कारण अंतिम रूप से उनका चयन नहीं हो सका।
हालांकि उनके इंटरव्यू से साल भर पहले ही इस परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित किया जा चुका था। सुहासिनी ने इंटरव्यू पर भी सवाल उठाए लेकिन इस मामले में कुछ नहीं हुआ। उधर, जब यह शिकायत सही पाई गई कि गलत कोडिंग की वजह से सुहासिनी की कॉपी बदली है तो लोक सेवा आयोग के गोपनीय विभाग से दो कर्मचारियों को तत्काल हटा दिया गया। बृहस्पतिवार को इस मामले में आयोग के समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। साथ ही उनके खिलाफ अनुशसनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई। मामले में संयुक्त सचिव रिजवानुर्रहमान को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।