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High Court : गैंगस्टर की कार्रवाई के लिए बने प्रावधानों पर अमल नहीं, खफा कोर्ट ने अपर गृहसचिव से जवाबी हलफनामा

Sat, 31 Aug 2024 06:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अमरोहा के आसिफ की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति बीके बिरला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने याची के विरुद्ध केस की विवेचना और उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए जिलाधिकारी और एसपी अमरोहा के अलावा मंडलायुक्त मुरादाबाद से इस बाबत हलफनामा मांगा था।
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अदालत का आदेश - फोटो : istock
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करते समय प्रावधानों का सही भावना से पालन नहीं करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि शनि मिश्रा केस में गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों के पालन के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। इसके अलावा कई अन्य मामलों में भी कोर्ट ने निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अधिकारी इसका पालन नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई पर अपर मुख्य सचिव गृह से आदेश के अनुपालन पर हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।

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अमरोहा के आसिफ की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति बीके बिरला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने याची के विरुद्ध केस की विवेचना और उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए जिलाधिकारी और एसपी अमरोहा के अलावा मंडलायुक्त मुरादाबाद से इस बाबत हलफनामा मांगा था। कहा गया था कि शनि मिश्रा केस में दी गई गाइड लाइन और इसे लेकर 21 जनवरी 2024 को अपर मुख्य सचिव गृह की ओर से जारी सर्कुलर की उनको जानकारी थी अथवा नहीं। कोर्ट ने कहा कि किन परिस्थितियों में एसपी और जिला अधिकारी ने याची के विरुद्ध गैंग चार्ट अनुमोदित करते समय उसमें अपनी संतुष्टि रिकॉर्ड नहीं की। जबकि, एक्ट के प्रावधानों के अनुसार ऐसा करना अनिवार्य था।

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तीनों अधिकारियों ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि उन्हें गाइडलाइन और सर्कुलर की जानकारी तो थी, लेकिन चुनावी व्यस्तता के कारण प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं हो सका। कोर्ट ने इस हलफनामे पर असंतोष जताते हुए बेहतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।

शासकीय अधिवक्ता एके संड ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किया जा रहा है । उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि कोर्ट के निर्देशानुसार और गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों के तहत राज्य स्तरीय सुपरवाइजरी कमेटी का गठन कर दिया गया है। सितंबर में इसकी बैठक होगी। हालांकि कोर्ट ने इस पर हैरानी जताई कि प्रमुख सचिव न्याय जो कि इस कमेटी के सदस्य हैं उनको इसकी जानकारी ही नहीं दी गई।

शासकीय अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराया जा रहा है और उन्हें इसके लिए थोड़ा समय और दिया जाए। शासकीय अधिवक्ता के अनुरोध पर कोर्ट ने कोई विपरीत आदेश न पारित करते हुए अगली सुनवाई पर अपर मुख्य सचिव गृह को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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