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तीन छात्राओं ने तानी थी आंदोलन की छतरी

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Protest against caa and nrc at mansoor ali park in roshanbagh - फोटो : CITY DESK
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बढ़ता गया एनआरसी, सीएए के विरोध में मंसूर अली पार्क में शुरू धरने का दायरा
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सपा, वामपंथी, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने संभाली आंदोलन की कमान
प्रयागराज। एनआरसी, सीएए और एनपीआर के विरोध में मिर्जा गालिब रोड स्थित मंसूर अली पार्क में शुरू आंदोलन का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। पार्क मेें मात्र तीन छात्राओं ने जिस आंदोलन की छतरी तानी थी, धीरे-धीरे उसके नीचे पूरी जमात जुट गई है। पार्क में पांच दिनों से धरना दे रहीं महिलाओं के समर्थन में स्थानीय लोगों के अलावा सियासी दल भी आ जुटे।
हालांकि, आंदोलन की अगुवाई करने वालों की पूरी कोशिश है कि इस मुहिम को धार्मिक और सियासी चश्मे से न देखा जाए। उन्होंने इसे भारतीय नागरिकों के संघर्ष का नाम दिया है। धरने की शुरुआत निजी कंपनी में नौकरी करने वाली सायरा, कंपनी सेक्रेटरी में कारपोरेट लॉ की पढ़ाई करने वाली नाज फातिमा एवं एक छात्रा फातिमा ने की लेकिन धीरे-धीरे करके सैकड़ों महिलाएं समर्थन में साथ आ गईं। पांचवें दिन बृहस्पतिवार को तो पूरा पार्क महिलाओं के कब्जे में रहा।
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आंदोलन के समर्थन में जुटीं महिलाओं के साथ आए पुरुषों ने बेरिकेडिंग के बाहर डेरा डाल रखा है। ध्ररने में घरेलू महिलाओं के अतिरिक्त छात्राओं की संख्या भी ज्यादा है। धरने में घर की बड़ी-बूढ़ी महिलाओं के साथ बच्चियां भी शामिल हैं। पहले दिन ही आंदोलन के औचित्य पर सवाल उठाने वाली पुलिस बृहस्पतिवार की सुबह भी पहुंची लेकिन महिलाओं के रुख को भांपते हुए पूछताछ करके ही चली गई।
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आंदोलन के बढ़ते दायरे को इसी से समझा जा सकता है कि सपा की ऋचा सिंह, नेहा यादव, कांग्रेस के परवेज अख्तर, इरशाद उल्ला समेत कई दलों के नेता आंदोलन का हिस्सा बने हुए हैं। इससे पहले माकपा की सुभाषिनी अली, सपा के रेवती रमण सिंह समेत अनेक नेता आंदोलन का हिस्सा बनकर हौसला बढ़ा चुके हैं। आंदोलन का हिस्सा बनने और समर्थन देने वालों का सिलसिला जारी है।
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