जिला अदालतों में तैनात लोक अभियोजकों को अब अपने काम की रिपोर्ट हर दिन देना होगा। गृह विभाग ने इसके लिए ऑनलाइन सिस्टम विकसित कर दिया है। अभियोजकों को सारे रिकार्ड ऑनलाइन ही भरने होंगे। अभियोजकों को इसके लिए शासन की तरफ से लैपटॉप भी मुहैया कराए गए हैं। अभियोजकों को पहले भी अपने काम का विवरण देना होता था लेकिन इस तरह की व्यवस्था नहीं की गई थी लेकिन मुकदमों के बढ़ते बोझ, काम की सहजता और पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था को अपनाया गया है।
गृह विभाग की ओर से की नई व्यवस्था के अनुसार इंटर ऑपरेबुल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के अंतर्गत ऑनलाइन ई-पॉसिक्यूशन (अभियोजन) की शुरूआत की गई है। यह व्यवस्था ऑनलाइन ही मौजूद है। इसके तहत अभियोजकों को रोजाना किए जाने वाले मुकदमों की पैरवी, वादों का निस्तारण, जमानत निरस्त कराना, विधिक सलाह आदि का विवरण देना होगा। इसके लिए ही उन्हें पुलिस के साथ सामंजस्य बनाकर वादों का जल्दी निस्तारण कराना होगा।
अपर निदेशक अभियोजन राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अभियोजकों को इसके लिए लैपटॉप उपलब्ध करा दिया गया है। जिन अभियोजकों को अभी लैपटॉप नहीं मिल सका है, जल्दी ही उन्हें भी उपलब्ध करा दिया जाएगा।
अभियोजकों को ऑनलाइन ही अपना रिकार्ड देना है। प्रदेश में अब तक छह सौ से अधिक अभियोजकों को लैपटॉप दिए जा चुके हैं। इसमें इलाहाबाद के भी अभियोजक शामिल हैं। अपर निदेशक ने बताया कि जल्दी ही जिला शासकीय अधिवक्ताओं और जिला अपर शासकीय अधिवक्ताओं को भी लैपटॉप मुहैया कराए जाने की शासन की योजना है। इससे न्याय प्रक्रिया में गति आएगी और मुकदमों का निस्तारण भी जल्दी हो सकेगा। इसका लाभ वादकारियों को भी होगा। वे भी अपने अभियोजन अधिकारी को जानकर मुकदमों की पैरवी कर सकेंगे।
एफआईआर और जांच रिपोर्ट ऑनलाइन भी देख सकेंगे न्यायिक अफसर
अपर निदेशक राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत न्यायिक अफसरों को जल्दी ही कई और सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। उन्हें किसी भी मामले की एफआईआर के लिए पुलिस अफसरों को इंतजार नहीं करना होगा। वे ऑनलाइन ही एफआईआर को देख सकेंगे। इस व्यवस्था के तहत पुलिस अफसरों को भी इससे जोड़ा जाएगा। ताकि वे मुकदमों से जुड़े सभी रिकार्डों को ऑनलाइन फीड कर सकें। न्यायिक अफसर रिपोर्टों को अपनी सुविधा के अनुसार देख सकेंगे। इसके लिए उन्हें पासवर्ड भी आवंटित किया जाएगा। इस सिस्टम से फारेंसिक साइंस लेबोरेट्री को भी जोड़े जाने की योजना है। जिससे कि बिसरा सहित अन्य रिपोर्टों को भी ऑनलाइन देखकर वादों का निस्तारण किया जा सके।