निजी बसें परिवहन निगम के प्रयागराज रीजन को हर महीने करीब 20 लाख की चोट दे रही हैं। शहर में सबसे ज्यादा खराब स्थिति सिविल लाइंस और लीडर रोड बस अड्डे की है। यहां निजी बसों के संचालक सवारियों का हाथ पकड़कर उन्हें अपनी बसों में खींच ले जाते हैं।
वहीं, शहर के आठ स्थानों से चलने वाली कई निजी बसों के रंग भी रोडवेज बसों जैसे हैं। जिस वजह से उनकी पहचान करना मुश्किल है कि ये निजी हैं या निगम की बसें हैं। आरटीओ की तरफ से रूट निर्धारण के बाद भी यह बसें बेधड़क कौशाम्बी, सिराथू, प्रतापगढ़, भरवारी, महेवा, मेजा रोड, मिर्जापुर, चाकघाट सहित अन्य स्थानों के लिए सवारी ढो रही हैं।
कहां-कहां है इन बसों का ठिकाना
1-खुसरोबाग के पास से चलती हैं निजी बसें
इन बसों का संचालन पुराने शहर में खुसरोबाग के दो स्थान लीडर रोड और मछली चौराहा वाली रोड से होता है। जहां से इन बसों का संचालन चरवा, सराय अकिल, कौशाम्बी, सिराथू, राजापुर, मूरतगंज, भरवारी, करारी व सैनी के लिए होता है।
2-सिविल लाइंस में तीन स्थान से संचालन
सिविल लाइंस में हनुमान मंदिर के पीछे वाले गेट, प्रयाग संगीत समिति और पत्रिका मार्ग से इन बसों का संचालन किया जाता है। यहां ढेकवा, जौनपुर, बनारस, प्रतापगढ़ व सुल्तानपुर के लिए बसों का संचालन होता है।
3-रामबाग में तीन जगहों से चलतीं हैं निजी बसें
रामबाग में तीन स्थानों से यह बसें मेजा, हंडिया, फूलपुर, सहसों, मिर्जापुर व चाकघाट सहित अन्य स्थानों के लिए चलती हैं।
बोले अफसर
निजी बसों की वजह से हर महीने जोन की रोडवेज बसों को लगभग 20 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। आरटीओ के साथ मिलकर कई बार कार्रवाई की गई, लेकिन यह कुछ दिन बाद फिर से मनमानी शुरू कर देते हैं। - रवींद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रबंध, राज्य परिवहन निगम।
निजी बस संचालकों की मनमानी रोकने के लिए सोमवार से विशेष योजना के तहत कार्रवाई की तैयारी है। -हिमेश तिवारी, आरटीओ।