पीलीभीत जेल में सात टाडा बंदी सिखों की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को तलब कर लिया है। हिरासत में मौत के इस मामले में आरोपी जेलकर्मियों पर से सरकार ने 2007 में मुकदमा उठाने की अधिसूचना जारी की थी। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका अभी लंबित है तथा कोर्ट ने प्रदेश सरकार से इस हलफनामा मांगा था। कई बार के आदेश के बावजूद जवाब दाखिल करने में नाकाम रहने पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को पांच मार्च को तलब कर लिया है। गुरनाम सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की पीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका पर पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी का कहना था आठ और नौ नवंबर 1994 को पीलीभीत जेल में सात टाडा बंदियों की 12 घंटे के भीतर मौत हो गई। इनमें से छह बंदी अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिए गए जबकि सातवें ने गंभीर चोटों के कारण 12 दिन बाद किंगजार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ में दम तोड़ दिया। जबकि 21 गंभीर घायल बंदियों 2007 में इलाज के बाद वापस जेल में भेजा गया। इस मामले में तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट विंध्याचल सिंह यादव और उनके मातहत जेल कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
अधिवक्ता का कहना था कि गृह विभाग की संस्तुति पर राज्यपाल ने 16 जनवरी 1995 को विंध्याचल सिंह यादव पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति प्रदान कर दी थी। इसके बावजूद तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने अभियुक्तों पर मुकदमा वापसी की स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल है। कोर्ट ने इस पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था मगर कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया जिस पर अदालत ने प्रमुख सचिव गृह को तलब किया है।