नामी कंपनियों की एक्सपायरी नमकीन जानवरों को खिलाने के नाम पर खरीदकर उसकी दोबारा पैकिंग कर बाजार में बेचने के खेल के बारे में प्रकाशित ‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। ‘अमर उजाला नेटवर्क’ पर 21 फरवरी को प्रकाशित इस रिपोर्ट पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को स्वत: योजित जनहित कायम करने का निर्देश दिया है। याचिका पर शुक्रवार, 28 फरवरी को सुनवाई होगी।
‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि नामी गिरामी कंपनियों के एक्सपायरी नमकीन पैकेट, पशुओं को खिलाने के नाम पर नीलामी में सस्ते दाम पर खरीद लिए जाते हैं। इसके बाद कालाबाजारी करने वाले इस नमकीन को नए रैपर में पैक कर दुकानों पर सप्लाई कर देते हैं, जो आम लोगों के घरों तक पहुंचता है। यह रिजेक्टेड नमकीन स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है।
हल्दीराम, बीकाजी, बीकानेरी, पारले, बालाजी और क्रक्स जैसी कंपनियों की एक्सपायरी नमकीन पशुओं के चारे के लिए नीलाम की जाती हैं। इसे खरीदने के बाद नई चमकदार पैकिंग में पैक किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना तकरीबन सौ टन एक्सपायरी नमकीन की खपत होती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले कंपनियां एक्सपायरी नमकीन 10 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बेचती थीं। मगर बीते दो तीन वर्षों में कालाबाजारी करने वालों में प्रतिस्पर्धा और होली के त्योहार के मद्देनजर मौजूदा समय में इसकी कीमत 35 से 37 रुपये प्रति किलो है। इसमें पांच रुपये प्रतिकिलो का स्पेशल नमक और रिजेक्टेड मिर्च भी खुले बाजार से खरीदकर मिलाई जाती है।
कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट के तथ्य गंभीर हैं। इसलिए खाद्य पदार्थ में इस मिलावट पर संज्ञान लिया जाना उचित होगा। मामले की सुनवाई जनहित याचिका के तौर पर 28 फरवरी को होगी।