लॉ म्यूजियम में असिस्टेंट लॉ रिपोर्टर के पद के लिए पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू द्वारा किया गया आवेदन।
- फोटो : अमर उजाला।
चयन न होने पर काफी निराश हुए थे पंडित नेहरू
इसी दौरान उनके संपर्क में कुछ ऐसे लोग आए जो देश की आजादी के लिए आंदोलन कर रहे थे। इसके बाद नेहरू भी आजादी के आंदोलनों में शामिल होने लगे। कुछ दिनों बाद सन 1916 में उनकी मुलाकात गांधी जी से हुई। इसके बाद वह सक्रिय रूप से आजादी के आंदोलन में शामिल होने लगे और पूरी तरह से अपने आपको देश के लिए समर्पित कर दिया। देश के प्रति उनके समर्पण का ही नतीजा रहा है कि वह गांधी जी के साथ ही साथ पूरे देश के जन-जन के चहेते बन गए और जब देश आजाद हुआ तो वह देश के पहले प्रधानमंत्री बने।
लॉ म्यूजियम में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की ओर से लॉ रिपोर्टिंग के लिए किया गया आवेदन पत्र आज भी सुरक्षित रखा हुआ है। बड़ी संख्या में लोग इसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं। नेहरू जी के हाथ से लिखे आवेदन पत्र को देख रहे अधिवक्ता उग्रसेन कुमार पांडेय, अय्यप्पा कॉलोनी ने कहा कि यही हाईकोर्ट इलाहाबाद की खासियत है कि वकालत चली तो मोती लाल, नहीं तो जवाहर लाल बन जाते हैं लोग।
लॉ म्यूजियम में पुराने दस्तावेजों को देखते लोग।
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महत्वपूर्ण फैसलों की रिपोर्ट तैयार करते थे असिस्टेंट लॉ रिपोर्टर
असिस्टेंट लॉ रिपोर्टर का काम महत्वपूर्ण फैसलों की रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट के जर्नल में प्रकाशित करना होता था। इसी जर्नल के माध्यम से हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी मिलती थी। अब इस पद की जगह इंडियन लॉ रिपोर्ट (आईएलआर) सेक्शन में जूनियर लॉ रिपोर्टर का चयन किया जाता है। इनका कार्यकाल पांच साल के लिए होता है। ये हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों की रिपोर्ट तैयार करते हैं।लॉ म्यूजियम में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की हैंड राइटिंग में लॉ रिपोर्टिंग के लिए किया गया आवेदन पत्र रखा गया है। बड़ी संख्या में इसे देखने के लिए लोग म्यूजियम में आते हैं। - आरती, ज्वाइंट डायरेक्टर लॉ म्यूजियम