हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से मानव तस्करी संबंधी कानून को सही तरीके से नहीं लागू किए जाने पर जवाब तलब किया है। वाराणसी की संस्था गुड़िया ने जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि यूपी में मानव तस्करी की रोकथाम और अपराधियोें को दंडित करने की भारतीय दंड संहिता की धारा 370 का पालन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। सरकार इसे लेकर संवेदनशील नहीं है।
पुलिस मानव तस्करी के मामले में जो प्राथमिकी दर्ज करती है उनकी जांच में कानूनी प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया जाता है। याची ने कोर्ट के सामने 127 प्राथमिकी उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत की जहां मानव तस्करी के मामलों में संतोषजनक तरीके से कानूनी प्रावधान का पालन नहीं किया गया। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने प्रदेश सरकार से छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
उल्लेखनीय है कि मानव तस्करी के अपराध के लिए आईपीसी की धारा 370 दंड का प्रावधान करती है इसके तहत दोषी पाए जाने पर सात से दस वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
इस धारा के तहत हुए अपराध की विवेचना जांच अधिकारी का विशेष दायित्व होता है। मानव तस्करी कानून पुस्तक के लेखक मो. हसन जैदी बताते हैं कि जांच अधिकारी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उसे संगठित अपराध का समूल नाश करना है। उसका दायित्व है कि अवैध मानव व्यापार के अड्डों का पता लगाए, इसमें शामिल अन्य लोगों ट्रांसपोर्टर, आर्थिक मदद करने वालों की पहचान, शामिल लोगों की भूमिका की जानकारी करना, वेश्यालयों के रिकार्ड का आंकलन करना आदि शामिल है। सर्वोच्च न्यायालय ने बचपन बचाओ आंदोलन की जनहित याचिका पर मानव तस्करी की रोकथाम के लिए विस्तृत गाइड लाइन दी है।