इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला और सत्र न्यायाधीशों को एक पत्र जारी कर 7 वर्ष या उससे कम सजा वाले मामलों में जेल में बंद आरोपियों का पूरा विवरण तलब किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला और सत्र न्यायाधीशों को एक पत्र जारी कर 7 वर्ष या उससे कम सजा वाले मामलों में जेल में बंद आरोपियों का पूरा विवरण तलब किया है।
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सुप्रीम कोर्ट के सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई मामले में दिए गए फैसले के तहत अब ऐसे मामलों में जमानत के समय आरोपी की कस्टडी में भौतिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है। बल्कि पेशी पर ही उनकी जमानत याचिका तय की जानी चाहिए या फैसला होने तक अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। इसी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए हाईकोर्ट ने प्रदेश की सभी जिला अदालतों से बंदियों का ब्योरा मांगा है।
रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय से जारी आदेश में सभी जिला न्यायाधीशों को निर्देश दिया गया है कि वे एनेक्सचर-I के प्रारूप में बंद कैदियों से संबंधित डेटा तैयार करवाएं। इस रिपोर्ट को 21 सितंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से दिशा पोर्टल पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।