जैसे वर्तमान देय कुल परिलब्धि का 50 प्रतिशत और ग्रोथ रेट या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (वार्षिक फिक्स रेट), वर्तमान बेसिक पे और ग्रोथ रेट या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (वार्षिक फिक्स रेट), तदर्थ शिक्षक का वर्तमान बेसिक पे व प्रत्येक आगामी पांच वर्षों की सेवा पर रुपये दस हजार की वृद्धि (अधिकतम 50000 तक)। इन विकल्पों को लागू किए जाने में निम्नलिखित प्रतिबंधों को लागू किया जाना भी समीचीन होगा।
इसके तहत मानदेय उन्हीं अध्यापकों को देय होगा, जो सत्र 2021-22 तक वेतन पाए हो, और संस्था में सम्प्रति कार्यरत हों। संबंधित अध्यापक पद सृजन के सापेक्ष कार्यरत होंगे। यदि किसी अध्यापक का पद चयनित अभ्यर्थी से भरा जा चुका है अथवा विवादित होगा अथवा शिक्षक की आवश्यकता व औचित्य न होने की दशा में तदर्थ श्क्षिकों का जनपद के किसी अन्य विद्यालय में रिक्त पद पर समकक्ष पद के प्रति कार्य लेते हुए उपरोक्त अनुतोष प्रदान किया जा सकता है। तैयार किए प्रस्ताव में यह भी सुझाया गया है कि दिए गए विकल्पों के आधार पर इन शिक्षकों के भुगतान पर कितना खर्च आएगा। अगर शासन से इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगती है तो तदर्थ शिक्षकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर होगी।