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हाईकोर्ट : तीन सप्ताह में परियोजना को मंजूरी दें नहीं तो प्रमुख सचिव वित्त उपस्थित हों, नगर आयुक्त ने पेश किया

Thu, 22 Oct 2026 02:34 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या दूर करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने ड्रेनेज परियोजना को तीन सप्ताह में वित्तीय मंजूरी देने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं होने पर प्रमुख सचिव वित्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा। योजना में नालों की क्षमता बढ़ाने, नए नालों के निर्माण और मोरी गेट पंपिंग स्टेशन के उन्नयन का प्रस्ताव है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज में जलभराव की समस्या पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वित्त विभाग को छह अक्तूबर 2026 के शासनादेश से ड्रेनेज सिस्टम को लेकर स्वीकृत परियोजना को तीन सप्ताह में वित्तीय मंजूरी देने और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं होने पर प्रमुख सचिव वित्त को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान याचिका पर दिया है। नगर आयुक्त शीलम साई तेजा ने कोर्ट में प्रस्तावित और चल रहीं परियोजनाओं का नक्शा पेश किया। इसमें मौजूदा नालों की क्षमता बढ़ाने, समानांतर नए नालों के निर्माण और मोरी गेट पंपिंग स्टेशन के उन्नयन का प्रस्ताव है। कोर्ट ने नालों की क्षमता, शहर की भौगोलिक बनावट और बारिश के पानी की मात्रा का तकनीकी आकलन कराने के लिए कहा है।

नालों के संगम स्थलों पर बड़े गड्ढे बनाने की संभावना पर भी विचार करने का आदेश दिया है, जिससे पानी ओवरफ्लो न हो। कोर्ट ने नगर निगम कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज, यूपी जल निगम (अर्बन) को तत्काल टेंडर नोटिस जारी करने के लिए कहा है, ताकि वित्तीय मंजूरी मिलते ही 40 दिन के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सके।

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कोर्ट ने जवाहर लाल नेहरू रोड और महात्मा गांधी मार्ग समेत अन्य स्थानों पर नालों के ऊपर बने स्थायी पेवमेंट, गेट, दीवार और निर्माण हटाने का आदेश दिया है। वहीं, पंपिंग स्टेशन और वाटर कैचमेंट टैंक के लिए केपी ट्रस्ट की जमीन को 90 साल की लीज के लिए अधिग्रहण की संभावना पर विचार करने के लिए कहा है। इस संबंध में अगली सुनवाई पर रिपोर्ट पेश करनी होगी। कोर्ट ने मामले में प्रमुख सचिव वित्त और गंगा प्रदूषण बोर्ड के माध्यम से यूपी जल निगम (ग्रामीण) को पक्षकार बनाया है।

50 साल तक न हो जलभराव, ऐसा ड्रेनेज मास्टर प्लान बनाएं : कोर्ट

कोर्ट ने जलभराव की समस्या पर मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के पर्यावरण एवं सिविल इंजीनियरिंग विभाग के चार प्रोफेसरों से तकनीकी मदद लेने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि शहर का ड्रेनेज मास्टर प्लान ऐसा तैयार किया जाए, जिससे 50 साल तक भारी बारिश में भी बाढ़ जैसे हालात न बनें।
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