उधर, मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्क्ष डॉ. मोनिका और कोरोना के नोडल ऑफिसर डॉ. सुजीत कुमार का कहना है कि अभी इस संबंध में शासन का कोई निर्देश नहीं आया है। उनका यह भी तक है कि लैब में काम कर रहे तकनीशियन सीधे मरीजों के संपर्क में नहीं आते हैं और उन्हें लैब में पूरे प्रोटेक्शन के साथ जाना होता है। इसलिए उन्हें वार्ड में काम करने वालों के मुकाबले खतरा कम हैं। जवाब में लैब में काम कर रहे तकनीशियन और अन्य अन्य कर्मचारियों का कहना है कि मरीजों का स्वाब सैंपल लेने के दौरान वे मरीजों के सीधे संपर्क में आते हैं और लैब में भी काम करने के दौराना इसके संक्रमण की आशंका हैं। इसलिए यह कहना गलत है कि वे कम जोखिम में काम कर रहे हैं।
कोटवां बनी स्थित कोविड-19 लेवल-1 हॉस्पिटल में रखे गए लैब तकनीशियनों को हफ्ते भर ड्यूटी के दौरान एक्टिव क्वारंटीन में रखा गया और उसके बाद 14 दिनों तक पैसिव क्वारंटीन में रखने के बाद घर भेजा गया। शासन की ओर से यही गाइडलाइन जारी की गई है। मेडिकल कॉलेज के लिए कोई अलग से गाइडलाइन नहीं है।