पद्मभूषण पं सामता प्रसाद उर्फ गुदई महाराज की 101 वीं जयंती पर ऑनलाइन नृत्य व गायन की प्रस्तुतियां यादगार बन गईं। यह कार्यक्रम पं सामता प्रसाद ट्रस्ट ऑफ तबला के तत्वावधान में श्रद्धा समर्पण समारोह के तहत किया गया।
समारोह की शुरुआत वाराणसी की तनु मिश्रा के भजनों से हुई। गणपति वंदना के बाद गुरु वंदना से उन्होंने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इनके बाद इविवि संगीत विभाग की डॉ रेनू जौहरी का स्वतंत्र तबला वादन सराहा गया। रेनु ने बनारस बाज की परंपरा में तीन ताल में उठान, ठेके का बांट, बांट व छंद आधारित रेला, चलन, बनारसी कायदा, पचपल्ली गत, फर्द, टुकड़े, चक्करदार, रेला व तिहाई की प्रस्तुति की।
फिर, देहरादून की नृत्यांगना मंजूषा सौरखिया ने -मीठे बोल बोले, बोले पायलिया ... गीत के बोल पर नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। अंत में दरभंगा घराने के ध्रुपद कलाकार प्रो प्रेम कुमार मलिक ने राग यमन की अवतारणी की। ध्रुपद अंग में राग मियां की मल्हार में सूलताल में निबद्ध बंदिश की उन्होंने प्रस्तुति की।
बतौर मुख्य अतिथि तबला वादक पं पूरण महाराज ने पं गुदई महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। संचालन नीरांजना शर्मा ने किया। इस कार्यक्रम से डॉ शशि भारद्वाज, प्रो पंकज माला शर्मा, डॉ राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल जुड़े रहे। कामिनी निषाद, ऊर्जा श्रीवास्तव, स्फूर्ति श्रीवास्तव, अंतस प्रकाश ने सक्रिय प्रतिभाग किया।