सूरज आग का गोला बना है और तेज धूप से बढ़ी भीषण गर्मी के आगे लोग बेबस हैं। धूप की तल्खी सुबह आठ बजे से ही बनी है। हाल यह है कि लोगों घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।
सूरज आग का गोला बना है और तेज धूप से बढ़ी भीषण गर्मी के आगे लोग बेबस हैं। धूप की तल्खी सुबह आठ बजे से ही बनी है। हाल यह है कि लोगों घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। पसीना लोगों का शरीर निचोड़ रहा है। भट्ठी की तरह रही सड़कों की आंच ऐसे की दोपहर 12 बजे के बाद शहर के कई प्रमुख सड़कों पर शाम तक सन्नाटा पसरा रहा।
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इतना ही नहीं धूप और लू के साथ असहनीय हुई गर्मी की वजह से लोगों के सिर चकराने व उलझन की समस्या हो रही है। हालांकि मंगलवार की अपेक्षा अधिकतम तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की बढ़त दर्ज की गई। बावजूद इसके गर्मी के प्रकोप पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
दिन चढ़ने के साथ धूप व लू के थपेड़े लोगों के चेहरों को लाल और शरीर के अन्य खुले हिस्सों को झुलसाने का काम कर रहे थे। रात में भी गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों के लिए परेशानी का कारण बने रहे। मौसम विभाग ने 25 मई तक 47 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहने की संभावना जताई है। ऐसे में गर्मी का सितम फिलहाल कम होने वाला नहीं है। मौसम वैज्ञानिक इविवि के डॉ. शैलेश राय के मुताबिक बुधवार को आसमान साफ रहेगा, तेज गर्म हवाएं चलेंगी। तापमान में बढ़ोत्तरी की संभावना है।
वहीं अगले अगले 24 घंटों के दौरान भीषण लू के लिए चलने की संभावना के वजह से औरैया, बलिया, भदोही, चित्रकूट, गाज़ीपुर, जौनपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, वाराणसी को ऑरेंज अलर्ट में रखा गया है। ऐसे में पूरे दिन लोगों के मोबाइल पर लू के अलर्ट की बीप बजती रही। जिसमें सावधान रहने की सलाह दी गई।
श्रमिकों व नागरिकों के लिए
1-कार्य के बीच-बीच में छाया में विश्राम दें।
2-दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहरी कार्य से बचें।
3-कार्यस्थल पर ठंडे पानी की व्यवस्था रखें।
4-कार्यस्थल पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रखें।
5-दोपहर में शरीर पर धूप का असर सबसे अधिक होता है, इस समय काम छाया में करें।
6-श्रमिकों के बच्चों के लिए छायादार स्थान की व्यवस्था करें।
7-श्रमिकों को तापघात से बचाव के तरीके समझाएं।
8-बार-बार पानी व ओआरएस का घोल पिलाते रहें।
पशुओं को रखें सुरक्षित
1-पशुओं को दिन में कम से कम 3-4 बार ताजा व ठंडा पानी पिलाएं।
2-दोपहर में छायादार स्थान पर रखें।
3-हरे चारे व पानी से भरपूर आहार दें।
4-दोपहर 11 बजे से शाम चार बजे के बीच पशुओं से खेत में काम न कराएं।
5-पशु आश्रय स्थलों में पर्याप्त वेंटिलेशन व पानी की व्यवस्था रखें।
6-पक्षियों के लिए छत पर व पेड़ के नीचे पानी के बर्तन रखें।
बच्चों के लिए
1-शिशु को सीधे धूप में बाहर न ले जाएं
2-समय-समय पर दूध-पानी डॉक्टर की सलाह के अनुसार देते रहें।
3-हल्के व सूती कपड़े पहनाएं
4-कमरे को ठंडा, हवादार व साफ रखें
5-शरीर में गर्मी, सुस्ती,अधिक पसीना व अधिक रोना दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
6-बाहर जाते समय शिशु के सिर को कपड़े व टोपी से ढककर रखें