गेहूं खरीद की स्थिति इस बार काफी खराब रही। मंगलवार को आखिरी तक तक मात्र 38 प्रतिशत ही खरीद हो पाई है। लक्ष्य के हिसाब से मंडल में प्रयागराज सबसे निचले पायदान पर है। सूबे की औसत खरीद से भी काफी पीछे है। प्रदेश में 55 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष करीब 36 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई है।
यानी, करीब 65 प्रतिशत गेहूं की खरीद हुई है। वहीं मंडल में 2.61 लाख मीट्रिक के सापेक्ष सवा लाख मीट्रिक टनख्खरीद हुई है। इस तरह से मंडल में करीब 48 प्रतिशत खरीद हुई है। इसके विपरीत जिले में 88500 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा गया था लेकिन 31 हजार से भी कम खरीद हुई है। इस तरह से 35 प्रतिशत के करीब खरीद हुई है।
वहीं कौशाम्बी में 47, प्रतापगढ़ में 40 तथा फतेहपुर में 67 प्रतिशत खरीद हुई है। गेहूं की कम खरीद की मुख्य वजह उत्पादन में कमी रही। बेमौसम की बारिश तथा ओलावृष्टि की वजह से पैदावार काफी कम हुई। साथ ही किसानों ने भी इस बार अधिक भंडारण कर रखा है। इसके अलावा बाजार में इस बार गेहूं की अधिक मांग रही तथा व्यापारियों ने उचित मूल्य दिया।
उन्होंने घर-घर जाकर गेहूं की खरीद भी की। इसकी वजह से किसान क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंचे। कम गेहूं खरीद के पीछे मानक भी मुख्य वजह रही। नियमानुसार टूटन और सिकुड़न छह फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रशासन की ओर से इसमें छूट की मांग की गई। सरकार ने मानक को शिथिल तो किया लेकिन आखिरी दिनों में वह भी कटौती के प्रावधान के साथ। इन वजहों से गेहूं खरीद का लक्ष्य काफी दूर रह गया। जिला खाद्य विपणन अधिकारी विपिन राय का कहना है कि इस बार गेहूं का उत्पादन काफी कम हुआ है। इसके अलावा किसानों ने गेहूं कम निकाला। इस वजह से लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।