प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय की शनिवार को हुई कार्य परिषद की बैठक में छात्र कल्याण निधि पर मुहर लगा दी गई है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में ‘सामाजिक समरसता शोध पीठ’ की स्थापना का निर्णय लिया गया है। यह शोध पीठ प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) के दार्शनिक, व्यवहारिक एवं सामाजिक व्यक्तित्व के विविध आयामों पर गुणवत्तापरक शोध को संपन्न कराएगी।
वहीं, छात्र कल्याण निधि से दुर्घटना, आपदा से प्रभावित जरूरतमंद छात्रों की आर्थिक मदद की जाएगी। साथ ही छात्र हित में अन्य कार्यों के लिए भी इस निधि का उपयोग किया जाएगा। कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय की संबद्धता समिति की संपन्न बैठकों के आधार पर संबद्धता आदेशों को अनुमोदित करते हुए संबंधित महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान करने की औपचारिक स्वीकृति भी प्रदान की।
इसके तहत राज्य विवि से संबद्ध 258 महाविद्यालयों में नए पाठ्यक्रमों के संचालन पर अंतिम मुहर लगाई गई। इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में अक्षय निधि, विकास निधि एवं सूचना तकनीकी केंद्र निधि की स्थापना के लिए भी स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में यह भी तय हुआ कि अकादमिक यात्रा के दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षक छात्रोपयोगी पुस्तकें खरीद सकेंगे।
इसके साथ ही शिक्षक कल्याण कोष की स्थापना को भी मंजूरी प्रदान की गई और वर्ष 2020 में नियुक्ति विश्वविद्यालय के 26 शिक्षकों को
स्थायी किए जाने पर मुहर लगाई गई। बीते एक अक्तूबर को हुई परीक्षा समिति की बैठक के कार्यवृत्त को भी अनुमोदन प्रदान किया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में खुलेगा स्वास्थ्य केंद्र
इविवि के पीआरओ डॉ. अविनाश कुमार श्रीवास्तव के अनुसार कार्य परिषद ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर विश्वविद्यालय परिसर में स्वास्थ्य केंद्र खोलने की स्वीकृति प्रदान की है। साथ ही शिक्षकों एवं नियमित
अधिकारियों/कर्मचारियों को कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
सभी विभागों को मिलेगी इंटरनेट की सुविधा
कार्य परिषद की बैठक में तय हुआ कि विश्वविद्यालय परिसर में संचालित सभी 11 विभागों को इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय सेमिनार/कांफ्रेंस आयोजित कराए जाने पर होने वाले खर्च का 50 फीसदी अनुदान विश्वविद्यालय की ओर से दिया जाएगा।