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प्रयागराजः हाईवे पर रात भर चलता है वसूली का खेल

Fri, 15 Mar 2019 01:01 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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demo - फोटो : amar ujala
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यमुनापार के सड़वा में एक दिन पहले हुए बवाल को लेकर अफसर चाहे जो बयान दें लेकिन सच्चाई यही है कि इसके लिए जिम्मेदार पुलिस ही है। पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के चलते ही हाईवे पर रात भर वसूली का खेल चलता है। यहां से होकर गुजरने वाले हर वाहन को पास करने का ‘रेट’ तय होता है। ‘भेंट’ चढ़ाने के बाद ही यह वाहन आगे के लिए रवाना हो पाते हैं। 
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प्रयागराज-मिर्जापुर व प्रयागराज-रीवा राजमार्ग से रोजाना हजारों ट्रकें गुजरती हैं। ज्यादातर ट्रकें प्रयागराज होकर गैरजनपदों को जाती हैं तो कुछ शहर में आती हैं। इनमें भारी मात्रा में माल लदा होता है। इन भारी कॉमर्शियल वाहनों के हाईवे पर आने के साथ ही वसूली का खेल शुरू हो जाता है। यह पूरा खेल पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से होता है। हाईवे पर स्थित चौकियों के साथ ही इनमें थानों में तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल होते हैं। चौकी या थाना क्षेत्रों से गुजरने वाले हर भारी कॉमर्शियल वाहन चालक को आगे बढ़ने के लिए पुलिसकर्मियों को भेंट चढ़ानी पड़ती है जिसके लिए ‘रेट’ तय होता है। भेंट देने के बाद ही यह आगे जा पाते हैं वरना उन्हें वहीं रोक दिया जाता है। चूंकि माल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का भाड़ा लाखों में होता है ऐसे में ट्रांसपोर्टर हजार-दो हजार रुपये पुलिसकर्मियों को देने से भी नहीं पीछे हटते हैं। यही वजह है कि वसूली का यह खेल आराम से चलता रहता है। 

ओवरलोड व गलत साइड से ट्रकों को पास कराने के लिए पुलिस से सेटिंग का काम आजकल ‘पासर’ कराते हैं। प्रयाग-मिर्जापुर हाईवे पर चारपहिया वाहनों में सवार यह ‘पासर’ गाड़ियों के आगे-पीछे ही रहते हैं। यूं तो इनका थानोें व चौकियों पर पैसा बंधा होता है। इसके बावजूद कहीं कुछ गड़बड़ होती है तो ले-देकर वाहन को सुरक्षित निकलवाने का काम इन्हीं के जिम्मे होता है। रात भर यह चारपहिया वाहनों से हाईवे पर घूमते नजर आते हैं। खासतौर पर प्रयागराज-मिर्जापुर हाईवे पर तो यह नजारा आम होता है। इसके बावजूद पुलिसकर्मी सबकुछ देखते हुए भी खामोश रहते हैं। 
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हाईवे पर चलने वाले वसूली के इस खेल के कारण ही इसके आसपास स्थित चौकियों पर तैनाती पाने को पुलिसकर्मियों में होड़ लगी रहती है। दरोगा के साथ ही सिपाही भी इस जुगाड़ में रहते हैं कि किसी तरह उनकी तैनाती इन चौकियों पर हेा जाए। इनमें नैनी स्थित जेल रोड व एग्रीकल्चर, औद्योगिक क्षेत्र स्थित सड़वा व रामपुर, घूरपुर स्थिम कर्मा व गौहनिया, मेजा में कोहड़ार घाट, मेजा रोड व दिघिया चौकी इसीलिए सबसे ज्यादा पुलिसकर्मियों की पहली पसंद रहती है। 

सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरे खेल की जानकारी कहीं न कहीं अफसरों को भी होती है। यही वजह है कि सब कुछ जानते हुए भी वह खामोशी ओढ़े रहते हैं। पहले तो कोई पुलिस के डर के चलते शिकायत ही नहीं करता, शिकायत की भी तो अफसर उस पर कार्रवाई तो छोड़िए, जांच तक की जहमत नहीं उठाते। हाईवे पर स्थित चौकियों के यह खेल ही कारण होता है कि अक्सर अफसर अपने चहेतों की तैनाती के लिए जोर-आजमाइश करते हैं। उधर ऐसा भी देखा गया है कि चहेतों को इनाम के तौर पर भी इन चौकियों में तैनाती दी जाती है। 
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