क्वारंटीन सेंटर के नोडल इंचार्ज डॉ. आनंद सिंह के मुताबिक सेंटर पर तैनात डॉक्टरों ने बताया है कि युवती खुद ही चलकर एंबुलेंस में बैठी थी। हालांकि, उसके जानने वालों का आरोप है कि युवती की तबीयत तीन दिन से खराब थी। सेंटर पर तैनात डॉक्टरों ने सही से देखा ही नहीं। इससे युवती की हालत गंभीर हो गई और एसआरएन अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव कहते हैं कि अस्पताल पहुंचने पर युवती की जांच की गई तो वह ब्रॉड डेड थी। 24 घंटे में दो लोगों की मौत से इंस्टीट्यूशन क्वारंटीन सेंटर की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। कोरोना के नोडल इंचार्ज कहते हैं कि सेंटर पर क्वारंटीन लोगोें के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 12 लोगों की ड्यूटी लगाई गई है। वे लोग क्वारंटीन लोगों की जांच भी कर रहे हैं। इन सबके बावजूद भी लोगों की मौत हो रही है। यह पोस्टमार्टम से ही पता चल सकता है। उन्होंने बताया कि रविवार को हंडिया तहसील के युवक की मौत हार्ट अटैक से हुई है।