‘कबूतर की वफादारी पर शक नहीं करना, वह तो घर को इसी मीनार से पहचानते हैं’, कहने वाले मुनव्वर राना का बात सौ फीसदी सच निकली। ‘आजाद क्लब पीजियन फ्लाइंग टूर्नामेंट’ की पहल पर बृहस्पतिवार को शुरू हुई बीसवीं कबूतरबाजी प्रतियोगिता के तहत कबूतरबाजों ने अपने कबूतरों के जरिए कमाल का करिश्मा दिखाया।
पहले राउंड में शहर की अलग-अलग जगहों से कुल 68 टीमों के कबूतरों ने उड़ान भरी। प्रतियोगिता में गोरे लाल नैनी और बिंदोस मीरापुर के कबूतरों ने दो बजे तक आकाश में उड़ान जारी रखी और विजेता बने। दूसरे राउंड मे आधी यानी 34 टीमों ने जगह बनाई। इस दौरान आलम मिनहाजपुर, गुड्डू रंग सेवईंमंडी और पप्पू नखासकोहना ने बतौर सेक्टर इंचार्ज प्रतियोगिता पर कड़ी निगरानी बनाए रखी। प्रतियोगिता को लेकर कबूतरबाजों के बीच खासा जुनून दिख्रा। संयोजक मुन्नू भाई के मुताबिक फाइनल राउंड तीन मई को होगा। विजेता टीमों को आकर्षक इनाम दिया जाएगा।
कबूतरबाजी प्रतियोगिता सुबह 5.30 बजे शुरू हुई। शर्तों के मुताबिक कबूतरों की उड़ान साढे़ चार घंटे की रही। जो कबूतर उड़ान पूरी करके ‘दस के पार’ यानी दस बजे के बाद लौटा, उसे ही गिनती में शामिल किया गया। दस बजे के बाद उड़ने वाले घंटों के आधार पर ही जीत-हार का फैसला किया गया। वहीं दस बजे से पहले लौटने वालों की गिनती नहीं हुई।
प्रतियोगिता में शमिल होने वाले कबूतरों को खास खुराक दी गई। उनके दाने यानी ‘करकल’ में चना, मटर, गेहूं, बाजरा, जौ, जोन्हरी, सरसों आदि शामिल रहा तो उड़ान के वक्त खाने में दूध, रोटी और मेवा भी खिलाया गया।
ऊंची उड़ान भरने वाले कबूतरों में गिरहबाज या कलाबाज कबूतर के अतिरिक्त सिर पर फूल वाला फुलसिरा, काला वाला कलसिरा, लाल वाला ललसिरा, काली दुम वाला कलदुमा और हरे वाला सब्ज तथा सफेद वाला नेखा कबूतर शामिल रहा।
प्रतियोगिता में मुंडेरा, नेवादा से लेकर दारागंज, झूंसी और नैनी से लेकर बेली,तेलियरगंज तक की टीमें शामिल हुईं तो खेल भावना के साथ कीडगंज के गुदून लाल, नैनी के गोरेलाल, सत्ती चौरा के गोपाल पंडा से लेकर बेली मे मम्मद, चकिया केसलमान, शाहगंज के अंसार तक सभी पूरे जोश खरोश के साथ जुटे।