धूमनगंज में पति व सुसर की हत्या में गवाह महिला को घर में घुसकर धमकाया गया। अश्लील हरकत की गई। शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाए इंस्पेक्टर ने थाने बुलाकर बेईज्जत किया और सुलह के लिए दबाव बनाया। पीड़िता ने अफसरों से गुहार लगाई और तब जाकर चार लोगों पर नामजद केस दर्ज किया गया।
कसारी मसारी निवासी फरहीन के पति अब्दुल रहमान व ससुर मो. इश्तियाक की 2011 में हत्या हो चुकी है। वह दोनों मुकदमों में गवाह भी है। उसका आरोप है कि उपरोक्त मुकदमों में अभियुक्त नबी अहमद, इस्माइल, एकराम व अकरम, जो जमानत पर हैं, उस पर सुलह के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। राइफल से लैस होकर घर में घुसकर गालीगलौज व धमकी के साथ मारपीट करते हुए अश्लील हरकत भी करते हैं।
थाने में शिकायत पर कार्रवाई तो हुई नहीं, उल्टा इंस्पेक्टर ने बुलाकर बेइज्जत किया और सुलह के लिए दबाव भी बनाया। 16 जून को अफसरों से शिकायत के बाद प्रार्थनापत्र थाने जाने पर भी अभियुक्तों ने 21 जून को घर में आकर धमकाया। जिसके बाद उसने एडीजी से मामले की शिकायत की। एडीजी के आदेश पर शनिवार को धूमनगंज थाने में चार लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस का कहना है कि जांच की जा रही है।
कैसे टूटेगा पुलिस-माफिया का गठजोड़
वैसे पुलिस पर अपराधियों से सांठगांठ के आरोप का यह जिले में पहला मामला नहीं। इससे पहले भी कई बार इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे समय में जब कानपुर मुठभेड़ में आठ जवानों के मारे जाने के बाद पुलिस-माफिया के गठजोड़ को लेकर हर ओर चर्चा है, जिले में भी इसे तोड़ना अफसरों के लिए बड़ी चुनौती है।