भूमध्य सागर से चलीं ठंडी हवाएं हिमालय की चोटियों से टकराकर गंगा-यमुना केबेसिन में प्रवेश कर गई हैं। शनिवार को सर्द हवाओं के झोंके चलने से ठंड बढ़ गई। पखवारे भर के भीतर पश्चिमी विक्षोभ की वजह से फिर वर्षा होने की आशंका है। इसी के साथ प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़ समेत पूर्वांचल भर में हाड़ कंपाने वाली चिल्ला जाड़ा पड़ने के संकेत मिले हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद भूमध्य सागर से चली ठंडी हवाएं अब उत्तरी मैदानी क्षेत्र यानी गंगा-यमुना के बेसिन में बहने लगी हैं। हिमालय की चोटियों के संपर्क में जल्द ही और भी चक्रवाती वायुखंडों के टकराने की आशंका है। यह जानकारी शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ प्रो एचएन मिश्रा ने दी। उन्होंने दावा किया कि पखवारे भर के भीतर पश्चिमी विक्षोभ के दूसरे झटके से फिर वर्षा हो सकती है।
इससे कोल्ड वेव चलने की भी आशंका है। सर्द हवाओं के झोंकों के कुलांचे भरने से निरंतर तापमान लुढ़कने लगा है। इस दिन अधिकतम तापमान 26.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इससे संगमनगरी में ठंड अंगड़ाई लेने लगी है। मौसम के जानकारों के मुताबिक ठड बढ़ने की दूसरी एक और बड़ी वजह सूर्य का मकर रेखा की ओर पहुंचना भी है।
फिलहाल सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में प्रवेश कर गया है। इससे उत्तरी गोलार्ध पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ने लगी हैं। ऐसे में अगले दो महीने तक कड़ाके की ठंड पड़ने की आशंका है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। ठंड शुरू होने से सड़कों की पटरियों पर रात गुजारने वाले खानबदोशों, मजदूरों और फेरी, पटरी वालों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। जिनके पास न घर है न कपड़े, वह इस ठंड में भी खुले आसमान में सड़क की पटरियों पर पेड़ों के नीचे या फिर फटे -पुराने कपड़ों की झोपड़ियों में छोटे बच्चों के साथ रात गुजारने के लिए मजबूर हो गए हैं।