हाल के दिनों में बिजली के टावर और पानी की टंकी पर चढ़कर बात मनवाने की घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर कब तक लोगों को इस तरह के हथकंड़े अपनाने पड़ेंगे। सवाल ये भी है कि एकाध वाजिब मामलों की देखा-देखी बात मनवाने के लिए टंकियों-टावरों पर चढ़ने के मामले बढ़े तो पुलिस क्या करेगी। कूदने की धमकी देकर पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने के मामलों में कोई कार्रवाई फिलहाल नहीं हुई है।
पहले भी इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। हर बार मौके पर अफरातफरी मचती है। पुलिस घंटों मशक्कत के बाद तमाशा करने वाले को सुरक्षित नीचे उतार लेती है। बाद में मामला शांत हो जाता है। कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में आत्महत्या की धमकी देकर दबाव बनाने की ज्यादातर घटनाओं में मामला निजी विवाद, आर्थिक दबाव, प्रेम विवाह आदि से संबंधित पाया गया है। पिछले दो वर्षों में ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इससे न सिर्फ आम लोगों में दहशत फैलती है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं पर भी दबाव बढ़ता है।
पुलिस कर सकती है कार्रवाई
अधिवक्ता सुधीर कुमार सिंह बताते हैं कि टंकी या टावर पर चढ़कर हंगामा करना, भीड़ इकट्ठा करना, व्यवस्था बिगाड़ना, आपराधिक धमकी, रेस्क्यू टीम को काम करने से रोकना, सरकारी कार्य में बाधा डालना, पुलिस-प्रशासन या आम जनता को डराना, आत्महत्या के लिए धमकी देने समेत कई कारणों से पुलिस चढ़ने वाले लोगों पर कार्रवाई कर सकती है।
तनाव पैदा करती हैं ऐसी घटनाएं
मनोचिकित्सक इफ्फत जिया बताती हैं कि टावर और टंकी पर चढ़कर बात मनवाने की घटनाएं धीरे-धीरे एक प्रवृत्ति का रूप लेती जा रही हैं। हालांकि, ऐसा करना बेहद खतरनाक है। इससे व्यक्ति की जान को गंभीर जोखिम रहता है। ऐसे कदम न सिर्फ खुद के लिए जानलेवा हो सकते हैं, बल्कि आसपास के लोगों और पुलिस के लिए भी परेशानी व तनाव की स्थिति पैदा करते हैं।
कोशिश रहती है कि ऐसे लोगों की समस्या का थाना स्तर पर ही समाधान कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट भी ऐसे लोगों को पीड़ित मानती है। हालांकि, अगर कोई सिर्फ दबाव बनाने के लिए इस तरह की हरकत करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- मनीष कुमार शांडिल्य, डीसीपी नगर