आंध्र प्रदेश की मेसर्स फ्लूएंट ग्रिड प्राइवेट लिमिटेड के बिलिंग साफ्टवेयर के जरिए आंख मूंद कर आईडी आवंटित की गई, जिससे बड़े पैमाने पर बिल संशोधन के नाम पर राजस्व की क्षति हुई है। फूलपुर, हंडिया समेत समेत पूरे प्रयागराज जोन के विद्युत वितरण खंडों में जेई, एसडीओ और कार्यालय सहायकों की आईडी पर प्राइवेट आपरेटर बिल संशोधन के लिए लगाए गए थे। पता चला है कि निजी आपरेटरों ने अफसरों की आईडी से मनमाने तौर पर बिल कंप्यूटर सिस्टम से हटाए और करोड़ों रुपये की विभाग को चपत लगाई। कई विद्युत वितरण खंडों में इस घोटाले को छिपाने के लिए आईडी हैकिंग का रूप देकर मामले की लीपीपोती की कोशिश भी की गई है।
इस मामले में कई अफसरों का गला फंसने की आशंका जताई जा रही है। बिल संशोधन घोटाले की विजिलेंस जांच कराने के सरकार के फैसले के बाद बिजली विभाग के अफसर और कर्मचारी सकते में हैं। पता चला है कि फ्लूएंट ग्रिड के साफ्टवेयर पर बिलिंग सिस्टम में प्राइवेट कर्मियों को भी आईडी उपलब्ध कराई गई थी। फ्लूएंट ग्रिड के साफ्टवेयर से निर्गत बिलिंग आईडी पर राजस्व जमा कराने के लिए एसडीओ स्तर पर विभाग की ओर से मोबाइल नंबर भी आवंटित किए गए थे, लेकिन फूलपुर में प्राइवेट कर्मी को आईडी निर्गत करने के साथ ही उसी कर्मी के निजी मोबाइल नंबर को बिलिंग सिस्टम में पंजीकृत करवा कर गड़बड़ी की जा रही थी।
सरकारी राजस्व संग्रह के लिए निजी कर्मी के नाम पर आईडी और उसके मोबाइल नंबर का सिस्टम में पंजीयन बड़े सवाल खड़े करता है। कहा जा रहा है कि फ्लूएंट ग्रिड के साफ्टवेयर से फूलपुर, हंडिया ही नहीं, पूरे जिले में इस तरह की गड़बड़ी की गई है। कौशांबी, प्रतापगढ़ और फतेहपुर में भी इसी निजी कंपनी के साफ्टवेयर से आईडी जारी कर जेई, एसडीओ के कंप्यूटर सिस्टम से बिलिंग कराई जाती रही है। अब तक फूलपुर और हंडिया में 2.64 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है।
कहा जा रहा है कि पूरे प्रयागराज जोन में बिलिंग संशोधन में गड़बड़ी की जांच कराई जाए तो अरबों रुपये का घोटाला सामने आ सकता है। फिलहाल इसमें बिजली विभाग के बड़े अफसरों की गर्दन बचाने के लिए दो लिपिकों को फूलपुर के कार्यालय सहायक आशीष श्रीवास्तव और हंडिया के कार्यालय सहायक मधुवन को निलंबित कर दिया गया है।
विद्युत बिलों में हेराफेरी छिपाने को आईडी हैकिंग का रूप देने का आरोप
बिल संशोधन की आड़ में गड़बड़ी पर निलंबित किए गए विद्युत वितरण खंड फूलपुर के कार्यालय सहायक आशीष कुमार श्रीवास्तव ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। निलंबित लिपिक का कहना है कि दूसरे विद्युत वितरण खंडों में विद्युत बिलों के गबन को आईडी हैकिंग का रूप देकर मामले की लीपापोती की जा रही है। ऐसे अफसरों का बचाव किया जा रहा है और छोटे कर्मचारियों को फंसाने की कोशिशें की जा रही हैं।