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Prayagraj Nagar Nigam : 1200 तक प्रति पोल मानक, 12,700 की दर से भुगतान, मंडलायुक्त ने दिया जांच का निर्देश

Mon, 28 Jul 2025 05:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

नगर निगम के विद्युत विभाग में बड़ा गड़बड़झाला उजागर हुआ है। जिस केमिकल अर्थिंग के लिए 1000 से 1200 रुपये प्रति पोल मानक हैं, महाकुंभ में 12,700 रुपये की दर से भुगतान किया गया।
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प्रयागराज नगर निगम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नगर निगम के विद्युत विभाग में बड़ा गड़बड़झाला उजागर हुआ है। जिस केमिकल अर्थिंग के लिए 1000 से 1200 रुपये प्रति पोल मानक हैं, महाकुंभ में 12,700 रुपये की दर से भुगतान किया गया। ऐसे में 1650 पोल पर केमिकल अर्थिंग के लिए 20 से 25 लाख रुपये खर्च होने चाहिए थे लेकिन करीब दो करोड़ नौ लाख रुपये की भारी भरकम राशि का भुगतान किया गया। पार्षदों की ओर से सवाल उठाने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद मामले में मंडलायुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं। खास बात यह है कि मामले में अपर नगर आयुक्त की ओर से की गई आपत्ति को भी दरकिनार कर दिया गया।

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नगर निगम के विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर अपर नगर आयुक्त अरविंद कुमार राय पहले ही सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने मुख्य अभियंता विद्युत यांत्रिक को सितंबर 2024 में एक गोपनीय पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री सृजन योजना में जो स्ट्रीट लाइट के लिए पोल लगाए जा रहे हैं, उनमें हर पोल पर केमिकल अर्थिंग की जा रहीहै। इसकी लागत 12 से 17 हजार के बीच आ रही है जबकि विद्युत विभाग ने इसकी कीमत दो हजार रुपये बताई है। उन्होंने मामले में पुन: परीक्षण की बात कही। इसके बावजूद केमिकल अर्थिंग पर मनमाना खर्च किया गया।

अब पार्षदों ने मंडलायुक्त से इसकी शिकायत की है। पार्षद आशीष द्विवेदी, कमलेश तिवारी और पंकज जायसवाल ने अर्थिंग पोल में हुई भारी गड़बड़ी को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग की मानक दर 1000 से 1200 रुपये प्रति पोल है लेकिन 12,700 रुपये की दर से भुगतान कर राशि की बंदरबांट की गई है। वहीं मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत का कहना है कि पार्षदों की शिकायत पर जांच के निर्देश दिए गए हैं।

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गड़बड़ी पर हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल

नगर निगम के विद्युत विभाग की ओर से महाकुंभ में की गई तमाम अनियमितताओं के खिलाफ हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, हालांकि अभी यह लिस्टेड नहीं है। समाजसेवी सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि जनहित याचिका में कोर्ट से अनियमितताओं पर संज्ञान लेने की गुहार लगाई गई है।

महाकुंभ के बाद बदल दिया नियम

महाकुंभ समाप्त होने के बाद ‘पांच पोल पर एक अर्थिंग’ का नियम बनाकर 18 हजार रुपये प्रति यूनिट का नया भुगतान पैटर्न तय कर दिया गया है। इस आधार पर नागवासुकी से गंगापथ तक अर्थिंग लगाने का नया टेंडर भी पास कर दिया गया है। इस संबंध में आशीष द्विवेदी का कहना है कि अर्थिंग के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने का मामला नगर निगम विद्युत विभाग की कमेटी में सदस्य होने के नाते उन्होंने उठाया तो अफसरों ने नियमों में बदलाव कर उसे वैधता दे दी।

गड़बड़झाले से महापाैर अंजान, बोले-अनियमितता है तो कार्रवाई करेंगे

नगर निगम विद्युत विभाग की ओर से महाकुंभ में कराए गए कार्यों पर सवाल उठने के बाद महापाैर गणेश केसरवानी का कहना है कि उनके संज्ञान में मामला नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनियमितता हुई है तो इसमें संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

घोटाले के खास तथ्य 

खर्च होना चाहिए था 20 से 25 लाख
खर्च कर दिए गए 2.09 करोड़
प्रति पोल मानक खर्च 1000 से 1200
वास्तविक भुगतान 12,700 प्रति पोल
अर्थिंग की कुल संख्या 1650 पोल
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नगर निगम में नियमों की धज्जियां उड़ाकर जनता के टैक्स के पैसों को पानी की तरह बहाया गया है। अब देखना होगा कि मंडलायुक्त की जांच में जवाबदेही तय होती है या फाइलों में ही मामला दफन कर दिया जाता है। -आशीष द्विवेदी पार्षद

मेला प्राधिकरण ने 10 पोल पर लगाई एक अर्थिंग
महाकुंभ के दौरान प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने 10 पोल पर एक अर्थिंग लगाई थी। जीआई स्टेट की अर्थिंग के लिए हमने पहले ही लाइन बनवा लिया था। नगर निगम के नियम कुछ अलग ही हैं। - अनूप सिन्हा, अधिशासी अभियंता विद्युत कुंभ मेला

विशेषज्ञ की सुनिए 

अर्थिंग कापर वायर और जीआई स्टेट से की जाती है। स्ट्रीट लाइट के लिए अगर की जा रही है तो जरूरी नहीं कि हर पोल पर केमिकल अर्थिंग की जाए। कारण स्ट्रीट लाइट में लोड कम होने से लीकेज की संभावना नहीं रहती है। - हेमंत शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर विद्युत सुरक्षा विभाग
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