prayagraj : आनंद गिरि को हरिद्वार से लेकर प्रयागराज एयरपोर्ट पहुंची सीबीआई टीम।
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जब मामले की सीबीआई जांच चल रही है और कथित सुसाइड नोट पर सवाल उठ रहे हैं तो सुसाइड नोट में लिखे गए बातों का पालन क्यों किया जा रहा है। अधिकतर संतों ने सुसाइड नोट को फर्जी करार दिया है। यहां तक की जिसको उत्तराधिकारी बनाने की बात कही गई है बलवीर गिरि ने भी यह कह दिया है कि सुसाइड नोट महाराजजी ने लिखा है या किसने लिखा है यह जांच का विषय है।
पूर्व में दो वसीयत को निरस्त किया जा चुका है। एक वसीयत मे योग गुरु आनंद गिरि को महंत बनाए जाने की बात कही गई थी लेकिन विवाद के बाद इसे निरस्त कर दिया गया था।
Prayagraj News : महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले की जांच करने मठ बाघंबरी गद्दी पहुंची सीबीआई की टीम।
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बलवीर की वसीयत में अखाड़े की परंपरा का पालन नहीं
विल्केश्वर मंदिर की जिम्मेदारी संभाल रहे उप महंत बलवीर गिरि के नाम बाघंबरी गद्दी की वसीयत निरंजनी अखाड़े की नियमावली के विपरीत बताई जा रही है। निरंजनी अखाड़े की परंपरा के अनुसार बाघंबरी मठ में वसीयत के जरिए ही महंत अपने उत्तराधिकारी का चयन करते रहे हैं। लेकिन, इस तरह की वसीयत तभी मान्य होती है, जब अखाड़े के साधु या पदाधिकारी उसके गवाह बनाए गए हों। चार जून 2020 को बलवीर गिरि के नाम महंत नरेंद्र गिरि ने जो वसीयत की है, उसमें अखाड़े के किसी गवाह को नहीं शामिल किया गया है। बल्कि इस वसीयत में मान सिंह और रवींद्र कुमार उपाध्याय को गवाल बनाया गया है। ऐसे में इस वसीयत पर सवाल उठने लगे हैं।
Prayagraj News : योग गुरु आनंद गिरि और महंत नरेंद्र गिरि। फाइल फोटो
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prayagraj : महंत बलवीर गिरि।
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