माघ मेले में संतों, कल्पवासियों के शिविरों के अलावा आधुनिक सुविधाओं वाले स्विस कॉटेज बसाने की शुरुआत जल्द होगी। पहली बार संगम की रेती पर आध्यात्मिक महत्व के इस बड़े मेले को पटना की पिरामिड एंड कंपनी बसाने जा रही है। कुंभ-2019 और माघ मेला-2020 से 45 प्रतिशत न्यूनतम दर पर इस कंपनी ने इस बार मेला बसाने का ठेका ले लिया है। इससे प्रतिस्पर्धा में जुटीं दिल्ली,आगरा समेत अन्य सात कंपनियां छंट गई हैं। इसमें ब्लैक लिस्ट लल्लूजी एंड संस के अलावा लल्लूजी के नाम से अलग-अलग छह कंपनियों ने टेंडर डाले थे।
गंगा, यमुना, सरस्वती के संगम पर 538 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरैल से नागवासुकि के बीच माघ मेला के लिए रंग-बिरंगे तंबुओं की बसाने का काम इस बार पटना की पिरामिड कंपनी के पास चला गया है। कम रेट पर डेंटर डाल कर माघ मेला बसाने का काम हथियाने वाली कंपनी को लेकर मंगलवार को माघ मेला कार्यालय परिसर में जमकर किचकिच हुई।
Kumbh tent city
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दिल्ली की टेंट सुविधा प्रदाता कंपनी न्यू बैराइटी और आगरा की गिरधारी लाल केदारनाथ सिंघल कंपनी के प्रतिनिधि इस न्यूनतम रेट को पुर्ननिर्धारित करने की गुहार लगाते रहे। इनके साथ टेंडर डालने वाली लल्लूजी के नाम से रजिस्टर्ड पांच अन्य कंपनियों ने भी पिरामिड एंड संस की दरों का विरोध किया,लेकिन मेला प्रशासन ने साफ कर दिया कि न्यूनतम दर पर डेंडर डालने वाली पिरामिड एंड संस को ही काम दिया जाएगा। इसमें टेंडर में हाल में ही प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से ब्लैक लिस्ट लल्लूजी एंड संस ने भी हिस्सा लिया था।
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ब्लैक लिस्ट होने की वजह से लल्लूजी एंड संस डे टेंडर निरस्त कर दिए गए। उल्लेखनीय है कि पिछली बार कुंभ और माघ मेले में 14 गुणा 28 आकार के महाराजा कॉटेज 41.580 हजार रुपये में बसाए गए थे। कनात के साथ डबल प्लाई फ्रेम वाले स्टोर टेंट 18.128 हजार रुपये में और 24 गुणा 38 साइज के दरबारी टेंट 31.725 हजार रुपये में बसाए गए थे। इसी तरह स्विस डीलक्स टेंट 10.152 हजार रुपये में और ईपी टेंट 8.520हजार रुपये में बसाए गए थे। जबकि इस बार के मेले में इन दरों से 45 प्रतिशत कम रेट पर कॉटेज लगाने का काम दिया गया है।
न्यूनतम रेट को लेकर घंटों पंचायत का नतीजा सिफर
जरूरत से ज्यादा रेट घटाने को लेकर मंगलवार को माघ मेला कार्यालय में टेंट कंपनियों के बीच घंटों पंचायत हुई। माघ मेला कार्यालय परिसर में लंबी मशक्कत के बाद माघ मेला प्रशासन रेट को लेकर दोबारा टेंडर कराने का दरों को संशोधित करने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस दौरान कई फर्मों के प्रतिनिधि यहां तक कहते सुने गए कि इतने कम रेट पर मेला बसाना मुश्किल हो जाएगा।