प्रशासन की ओर से भी इतनी बड़ी संख्या में गुजरात से आ रहे मजदूरों की जांच तथा उन्हें घर पहुंचाने के लिए विशेष तैयारी की गई है। सभी की स्टेशन पर ही थर्मल जांच कराई जाएगी। वहीं से बसों के माध्यम से उन्हें गृह जनपद भेजा जाएगा। प्रयागराज के श्रमिकों को भी होम क्वारंटीन किया जाएगा। जिनमें कोरोना के लक्षण होंगे उन्हें फिलहाल सात दिनों के लिए उनके गांव के नजदीक बने आ0श्रय स्थल में क्वारंटीन किया जाएगा। श्रमिकों को बसों तथा अन्य वाहनों से घरों तक पहुंचाया जाएगा।
मंडलायुक्त ने की तैयारियों की समीक्षा
मंडलायुक्त ने मंगलवार को कोरोना से बचाव एवं इलाज को लेकर प्रशासन और चिकित्सा विभाग की तैयारियों की समीक्षा की। बुधवार को श्रमिकों के आने को लेकर उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने पर्याप्त संख्या में थर्मल स्कैनर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही। कोरोनो के मद्देनजर बने तीनों स्तर के अस्पतालों में व्यवस्था की जानकारी ली।
उन्होंने एल - 3 कोविड अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन, वेंटीलेटर तथा अन्य उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने क्वारंटीन सेंटर, श्रमिकों को घर तक पहुंचाने, उनकी निगरानी आदि की बाबत भी आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में आईजी केपी सिंह, एसपी सिटी बृजेश श्रीवास्तव, अपर मंडलायुक्त प्रशासन भगवान शरण, अपर नगर आयुक्तए एडी हेल्थ एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे।
सोनभद्र भेजे गए 50 मजूदर
प्रयागराज। सोरांव में फंसे 50 मजदूरों को मंगलवार को उनके गृह जनपद सोनभद्र भेजा गया। सोरांव के जमुआ गांव से पैदल चलकर वे सिविल लाइंस पहुंचे थे। सूचना मिलने पर पहले उन्हें एडीसी में शिफ्ट किया गया। श्रमिक सोनभद्र जाना चाहते थे। भोजन कराने के बाद उन्हें बसों से सोनभद्र के लिए रवाना किया गया। मौके पर एडीएम प्रशासन वीएस दुबे आदि मौजूद रहे।
गुजरात में फंसे सैकड़ों लोगों की कोई सुनवाई नहीं
सरकार के दावों के विपरीत गुजरात में सैकड़ों मजदूर फंसे हैं और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। इनमें प्रयागराज के भी बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हैं। घर वापसी के लिए उन्होंने सरकार और प्रशासन की ओर से जारी हर नंबर पर संपर्क किया लेकिन सभी जगहों से निराशा मिली। वहां फंसे घूरपुर के रेरा गांव के अजय विश्वकर्मा, राजू विश्वकर्मा, उमाकांत विश्वकर्मा, प्रमोद बिंद आदि ने बताया कि वे सुधीर पावर लिमिटेड सिलवासा के वर्कर हैं।
लाकडाउन के बाद से काम ठप है। कंपनी ने खाने, मकान के किराया आदि के लिए आर्थिक सायायता नहीं की। ठेकेदार फोन नहीं उठा रहा है। अब मकान मालिक घर खाली करा रहा है। बिजली भी काट दी गई है। उनका कहना है कि गुजरात सरकार की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया लेकिन कोई मदद नहीं मिली। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने अथाल चौकी पर संपर्क किया तो उन्हें यूपी सरकार की ओर से श्रमिकों को बुलाए जाने की सूचना को अफवाह बताया गया। उन्होंने यूपी सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर भी संपर्क किया लेकिन यहां से भी कोई राहत नहीं मिली। सब जगह से हारने के उन्होंने रेरा गांव के प्रधान से भी संपर्क किया लेकिन उन्होंने भी कहा कि यहां से कुछ नहीं होगा।
किसानों का कर्ज माफ करने की मांग
अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कारपोरेट घरानों के 68 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर्ज माफ कर दिए गए हैं। उसी तरह से सभी केसीसी कर्ज माफ किए जाएं। साथ ही खरीफ फसल के लिए नए कर्ज जारी किए जाएं।