यमुनापार के पठारी इलाके में अवैध क्रशर प्लांट एवं गिट्टी खनन से पर्यावरण को खतरा बन गया है। इसकी शिकायत के बाद पर्यावरण निदेशालय तथा केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण इकाई की टीम ने डेरा डाल रखा है। तीन दिनों के लिए आई टीम ने शुक्रवार को शंकरगढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम के सदस्य शनिवार को भी अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे। इनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पठारी इलाके में अवैध क्रशर प्लांट एवं खनन की लगातार शिकायत मिल रही है। जलाशयों के सूखने एवं भूजल स्तर नीचे जाने के पीछे इसे ही मुख्य वजह माना जा रहा है। इसके अलावा सिलिका सैंड की वजह से वायु प्रदूषण का भी गंभीर खतरा बना हुआ है। इसकी शिकायत एनजीटी में हुई थी। इसी क्रम में पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने एडीएम प्रशासन, वरिष्ठ खान अधिकारी के साथ शंकरगढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया।
टीम ने बृहस्पतिवार को भी निरीक्षण किया था और यह क्रम शनिवार को भी जारी रहेगा। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरके सिंह का कहना है कि फिलहाल गड़बड़ी सामने नहीं आई है। तीन दिनाें के निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद ही स्पष्ट तौर पर कुछ कहा जा सकता है।
बंद मिले दर्जनों क्रशर प्लांट, उठे सवाल
पर्यावरण एवं प्रदूषण विभाग की केंद्रीय टीम को निरीक्षण के दौरान करीब दो दर्जन क्रशर प्लांट चालू हालत में मिले। वहीं कई प्लांट बंद भी मिले। ये प्लांट बिना अनुमति के शुरू किए गए थे। हालांकि अफसरों का कहना है कि ये प्लांट काफी समय से बंद हैं। इन पर जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि इस तरह से बंद क्रशर प्लांट मिलने से कई तरह के सवाल भी खडे़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अवैध रूप से चलने वाले प्लांट काफी पहले बंद करा दिए गए थे तो इन्हें हटाया क्यों नहीं गया।
दो वर्ष पहले भी हुई थी कार्रवाई
अवैध क्रशर प्लांट तथा खनन की शिकायत के बाद क्षेत्र में गिट्टी खनन के ज्यादातर पट्टे निरस्त कर दिए गए थे। दो वर्ष पूर्व निरीक्षण भी किया गया था। इस दौरान अवैध रूप से स्थापित कई प्लांट बंद करा दिए गए थे। साथ ही जुर्माना लगाया गया था।