प्रदेश सरकार की ओर से निजी स्कूलों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क पर नियंत्रण के लिए लागू कानून की खामियों का स्कूलों ने लाभ उठाते हुए फिर मनमानी शुरू कर दी है। 2018 में निजी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए कानून लागू किया गया था। लेकिन, इसका असर कहीं नहीं दिखता। शहर के अधिकांश स्कूलों में प्रति महीने पांच सौ से एक हजार रुपये के बीच की बढ़ोतरी की गई है। स्कूल वाले यह शुल्क किस मद में ले रहे हैं, उनकी फीस रसीद में इसका विवरण नहीं है।
नए नियम के तहत स्कूल प्रबंधन को अपनी वेबसाइट पर फीस सार्वजनिक करना था। लेकिन, अभी तक किसी भी स्कूल की वेबसाइट पर फीस का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। कुछ स्कूलों ने अभिभावकों को गुमराह करने के लिए वेबसाइट पर पिछले सत्र के शुल्क का विवरण सार्वजनिक किया गया है। कुछ बड़े विद्यालयों की ओर से अपनी वेबसाइट पर पूरे वर्ष की फीस दी गई है, इसमें कितनी फीस किस मद में ली जा रही है, इसका विवरण नहीं है। सरकार की ओर से पिछले शैक्षिक सत्र के बीच लागू किए गए नए नियम में यह कहा गया था कि स्कूल नए सत्र के शुरू होने के 60 दिन पहले विवरण वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।
उत्तर प्रदेश स्व वित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन ) अधिनियम, 2018 के अध्याय दो (विद्यालयों में प्रवेश एवं शुल्क) में स्पष्ट दिया गया है कि हर मान्यता प्राप्त विद्यालय प्रमुख, शैक्षिक सत्र शुरू होने के 60 दिन पहले अपनी वेबसाइट पर शुल्क का विवरण अपलोड करेगा, फीस की जानकारी को नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित करना होगा।
सीबीएसई से संबद्ध शहर के नामी स्कूल में शामिल एक समूह के कई स्कूलों में फीस का ब्रेक अप खत्म करके फीस बुक में वार्षिक शुल्क विवरण के साथ हर तीसरे महीने के शुल्क का विवरण दिया गया है। अब अभिभावकों एक साथ तीन महीने की बढ़ी फीस का बोझ पड़ेगा। स्कूलों ने सरकार के नए कानून की काट में कंपोजिट शुल्क लागू कर मनमानी शुरू कर दी है। स्कूलों ने कंपोजिट फीस के नाम पर मनमाने तरीके से अभिभावकों पर बोझ थोप दिया है। अभिभावकों में मिली शुल्क रसीद में फीस की मद में 500 से एक हजार रुपये के बीच बढ़ोतरी की गई है।
स्कूल की ओर से अचानक शुल्क बढ़ाने के बाद सोमवार को स्कूल पहुंचे अधिकांश अभिभावकों ने नाराजगी जाहिर की। आईसीएसई से संबद्ध शहर के एक स्कूल में हर तीसरे महीने के शुल्क में एक हजार की बढ़ोतरी की गई है। इसी प्रकार झूंसी क्षेत्र में सीबीएसई से जुड़े बड़े स्कूलों में मनमाने तरीके से हर महीने 500 रुपये तक शुल्क में बढ़ोतरी हुई है।
शहर के अधिकांश स्कूलों में बच्चों और अभिभावकों को रिजल्ट के साथ अगले क्लास के लिए किताबों की सूची के साथ पुस्तक विक्रेता का नाम भी बता दिया गया है। इसके साथ ही कुछ स्कूलों में किताबों की दुकान खोल दी गई है। स्कूलों में लगे स्टॉल पर अभिभावक लाइन में लगकर बच्चों के लिए किताब-कॉपी एवं स्टेशनरी खरीद रहे हैं।
निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी की जा रही है। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1) (ग) के अंतर्गत अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग को पहली कक्षा में प्रवेश दिया जाना है। बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से 16 अप्रैल को विद्यालयों में बच्चों के प्रवेश के लिए लॉटरी निकाली जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में प्रवेश 30 अप्रैल तक दिया जाएगा।