एक महीने कड़ी निगरानी में रहेगा मरीज
मरीज को एक महीने तक कड़ी निगरानी में संक्रमण मुक्त और सुरक्षित वातावरण में रखा जाएगा। इसके लिए स्पेशल वार्ड तैयार किया गया है। मरीज के साथ एक तीमारदार वार्ड में मौजूद रहेगा। वहीं, चिकित्सक से लेकर तीमारदार को ग्लब्स, मास्क व अन्य प्रकार के सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। मरीज 24 घंटे चिकित्सकों की निगरानी में रहेगा।
इलाज का 80 फीसदी खर्च अस्पताल व चैरिटी से होगा
बोन मैरो ट्रांसप्लांट में करीब 15 लाख रुपये तक खर्च होते हैं। जनपद का पहला ट्रांसप्लांट होने की वजह से 80 फीसदी खर्च चैरिटी व अस्पताल के फंड से किया जाएगा।
यह है बोन मैरो ट्रांसप्लांट
बोन मैरो ट्रांसप्लांट (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण) एक चिकित्सकीय प्रक्रिया है, जिसमें कैंसर या गंभीर रक्त विकारों (जैसे ल्यूकेमिया, थैलेसीमिया) के कारण क्षतिग्रस्त बोन मैरो को स्वस्थ स्टेम कोशिकाओं से बदला जाता है। यह प्रक्रिया शरीर में स्वस्थ रक्त कोशिकाएं बनाने की क्षमता को बहाल करती है।
पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट होने की वजह से मरीज की कोशिकाओं का उपयोग किया जाएगा। करीब एक महीने तक मरीज को कड़ी चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। 17 मार्च को मरीज ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती हो जाएगा। - डॉ. मानस दुबे, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए संक्रमण मुक्त व सुरक्षित स्पेशल वार्ड तैयार किया गया है। इसकी टेस्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पहला ट्रांसप्लांट 20 मार्च को होगा। ट्रांसप्लांट का 80 फीसदी खर्च अस्पताल के फंड व चैरिटी से किया जाएगा। - हरिओम सिंह, निदेशक, कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल