सूबे की पर्यटन मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी ने 20 साल के इंतजार के बाद अपने पिता की संसदीय सीट इलाहाबाद से अपनी किस्मत आजमाई। अपने राजनीतिक करियर के पांचवें लोकसभा चुनाव में पहली बार रीता बृहस्पतिवार को सांसद भी बन गईं। इसके पूर्व उन्होंने सपा के टिकट पर सुल्तानपुर से एवं कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से एक बार एवं दो बार लखनऊ से चुनाव लड़ चुकी हैं।
संगमनगरी में ही पली, बढ़ी 69 वर्षीय रीता बहुगुणा जोशी के लिए प्रयागराज की राजनीतिक जमीन नई नहीं है। शहर की पहली महिला मेयर भी वह 1995 में बनीं। तब उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। रीता जोशी दो बार विधायक भी बन चुकी हैं। पहली बार लखनऊ कैंट से उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2012 में चुनाव लड़ा। इसके बाद भाजपा के टिकट पर वर्ष 2017 में वे इसी सीट से निर्वाचित हुईं।
गी सरकार में वे कैबिनेट मंत्री भी बनीं। रीता का राजनीतिक कद शुरू से ही बड़ा रहा है। कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष का भी वे दायित्व संभाल चुकी हैं। रीता के पिता हेमवती नंदन बहुगुणा सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वर्ष 1971 में वे इलाहाबाद संसदीय सीट से सांसद बने थे। इसी तरह उनकी मां कमला बहुगुणा वर्ष 1977 में फूलपुर से सांसद निर्वाचित हुई थीं। माता-पिता के बाद अब रीता इलाहाबाद सीट से सांसद निर्वाचित हुई हैं। रीता के भाई विजय बहुगुणा भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। रीता को पार्टी नेता एवं उनके समर्थक ‘दीदी’ बोलकर ही संबोधित करते हैं।