बैरियर तोड़ कर आगे बढ़ने का आरोप
सुबह करीब 9.20 बजे वायरलेस पर सूचना प्रसारित हुई कि पांटून पुल नंबर दो की बैरिकेंडिंग तोड़ कर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगभग 200 साधु-संतों के साथ संगम रथ से आगे बढ़ रहे हैं। प्रशासन का आरोप है कि परंपरा के विपरीत रथ से स्नान करने की कोशिश की गई।
कब क्या हुआ , घटनाक्रम
सुबह 9.45 बजे
शंकराचार्य के संगम बैरियर पर पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। अधिकारियों ने भीड़ को देखते हुए रथ से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया, लेकिन शिष्य नहीं माने। बहस के बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
सुबह 10.11 बजे
अधिकारियों ने हाथ जोड़ कर समझाने की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बनी। इसके बाद दस से अधिक शिष्यों को पुलिस ने रथ के पास से हटाकर एक कमरे में बैठा दिया। इससे शंकराचार्य और नाराज हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सामने साधु-संतों के साथ मारपीट की जा रही है।
सुबह करीब 11 बजे
मंडलायुक्त ने शासन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, लेकिन तत्काल कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिला। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर डॉ. अमित पाल शर्मा और बलिया से आए सीओ रजनीश यादव ने फिर समझाने की कोशिश की, पर शंकराचार्य ने इनकार कर दिया।
सुबह 11.50 बजे
शंकराचार्य शिष्यों को छुड़ाने पर अड़ गए। पुलिस कमिश्नर के हस्तक्षेप पर शिष्यों को छोड़ा गया, लेकिन बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई। कुछ देर बाद पुलिस ने शिष्यों को फिर से बैठा लिया।
दोपहर 12.05 बजे
मंडलायुक्त ने दोबारा शासन से बात की। दिशा-निर्देश मिलने के बाद सादे वेश में तैनात पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। स्नानार्थियों की तरह दिख रहे पुलिसकर्मियों ने रथ को धीरे-धीरे संगम तट से बाहर निकालकर शंकराचार्य के शिविर की ओर बढ़ाया। इस दौरान पीछे-पीछे पुलिस बल मुस्तैद रहा।