डेंगू का कहर बढ़ता ही जा रहा है। जिले में डेंगू संक्रमण के 415 मामले सामने आ चुके हैं। बृहस्पतिवार को डेंगू के 12 नए मामले सामने आए। गंभीर हालत में 11 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इन सरकारी आंकड़ों से इतर संभावित डेंगू पीड़ितों की संख्या एक हजार के पार हैं। इन बुखार पीड़ितों में लक्षण तो डेंगू के हैं पर उनकी जांच मेडिकल कॉलेज से एलाइजा जांच नहीं हुई है। शहर के दस बड़े नर्सिंग होमों के आईसीयू में औसतन 15 ऐसे हैं, जिनकी प्लेटलेट्स ही नहीं कम हो रही है, बल्कि वे अन्य संक्रमण से भी ग्रसित हैं।
शहर के नए क्षेत्रों में डेंगू के प्रसार को रोकने के उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। नगर निगम का दावा है कि जोनवार तीन हजार से अधिक घरों के आसपास सफाई, छिड़काव कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मलेरिया विभाग भी प्रभावित इलाकों में औसतन दो हजार घरों में एंटी लार्वा छिड़काव करा रहा है। इसके बावजूद न मच्छरों की रोकथाम हो रही है और न ही संक्रमण कम हो रहा है।
शहर के सरकारी ही नहीं अधिकतर निजी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की भरमार है। शहर के एसआरएन, बेली, कॉल्विन में भी बुखार पीड़ित भर्ती हैं। निजी अस्पतालों में तो वायरल के वार से बीमारों की भरमार है। ज्यादातर मरीजों में डेंगू के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन उनकी मेडकल कॉलेज में एलाइजा जांच न होने के कारण ऐसे मरीज डेंगू संक्रमितों की सूची में दर्ज नहीं हैं। इन संभावित डेंगू मरीजों की संख्या एक हजार के पार है। सभी को बुखार कई दिनों से बने रहने की शिकायत है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आनंद सिंह के मुताबिक निजी अस्पतालों से एलाइजा जांच के बाद डेंगू संक्रमितों की सूची मिलती है। सभी संभावित मरीजों की जांच कराने के स्पष्ट निर्देश हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू के 11 नए मरीज चिह्नित किए गए हैं। विभिन्न अस्पतालों में 11 डेंगू संक्रमितों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि डेंगू का प्रसार नए क्षेत्रों में न हो, इस दिशा में निरोधात्मक कार्रवाई कराई जा रही है। बृहस्पतिवार को बाई का बाग, करनपुर, छोटा बघाड़ा, अतरसुइया, बेली कॉलोनी, लाला की सरैंया, नेवादा स्टैनली रोड के साथ शंकरगंढ़, मऊआइमा, मांडा और सैदाबाद में एक-एक व्यक्ति में डेंगू का पुष्टि हुई है।