जिले में पैदा होने वाले आलू के लिए अभी एक माह इंतजार करना होगा। आलू की अगैती फसल पंद्रह दिसंबर के बाद ही बाजार में आएगी। इसके बाद ही आलू के दाम कम होने की संभावना जताई जा रही है। तब तक लोगों को बाहर से आने वाले आलू के भरोसे ही रहना होगा।
जिले में हर साल करीब 87 हजार मीट्रिक टन आलू की पैदावार होती है। इस बार किसानों ने 31 हजार टन आलू कोल्ड स्टोरेज में डंप कर रखा था। जिले में विकासखंड लक्ष्मणपुर, मानधाता, गौरा, शिवगढ़ में आलू की खेती करने वाले किसान सब्जियों और गेहूं की फसल भी तैयार करते हैं। वैसे तो आमतौर पर आलू की फसल जनवरी माह की शुरुआत में ही तैयार होती है, लेकिन 60 दिन में तैयार होने वाले आलू की अगैती फसल 15 दिसंबर तक बाजार में आने की संभावना बनी रहती है।
यदि मौसम खराब नहीं होता तो दिसंबर की शुरुआत में आलू की खुदाई होने लगती है। मानधाता इलाके के आलू व्यापारी रामलखन पटेल ने बताया कि 15 दिसंबर तक आलू की खोदाई होगी। स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाला आलू बाजार में आने के बाद इसके दाम गिरेंगे। हालांकि इससे पहले फतेहपुर, पंजाब, कन्नौज समेत पश्चिमी जनपदों से आलू आने के बाद भी दाम में कमी आ सकती है। जनपद के अलावा प्रयागराज के मऊआइमा व सोरांव से भी स्थानीय आलू की खेप आती है।
नए आलू में नहीं है स्वाद, पुराने की डिमांड बरकरार
बाजार में बिकने वाला नया आलू अभी कच्चा है। दुकानदार मानते हैं कि बाहर से आने वाला नया आलू लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। चूंकि यह आलू कच्चा है। जिससे उसका कोई स्वाद नहीं मिलता। इस वजह से पुराने आलू की डिमांड अभी भी बरकरार है। नया आलू बाजार में 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।