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रिजर्व बैंक के सकुर्लर पर रोक लगाने से कोर्ट का इंकार

Mon, 27 Aug 2018 08:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
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भारी कर्ज से जूझ रही निजी बिजली उत्पादन कंपनियों से कर्ज वसूली को लेकर रिजर्व बैंक द्वारा जारी सकुर्लर पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इंकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार की हाईपावर कमेटी को निर्देश दिया है कि कंपनियों की दशा सुधारने के लिए उसके समक्ष लंबित संसदीय कमेटी की रिपोर्ट पर दो माह में रिपोर्ट पेश करे। कोर्ट ने कंपनियों को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा सात और बैंकिग रेग्युलेशन एक्ट की धारा 35 ए के तहत कार्यवाही करने की छूट दी है।
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प्रयागराज पावर जनरेशन कंपनी सहित बिजली उत्पादन कंपनियों की एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने सुनवाई की। कंपनियों ने आरबीआई के सकुर्लर को चुनौती दी थी। आरबीआई ने सकुर्लर जारी कर सभी बैंकों को पुनर्गठन का निर्देश दिया है। इसके तहत बैंक 200 करोड़ रुपये से अधिक बकाया वाला कंपनियों से वसूली की कार्यवाही करेंगे। कंपनियों पर 14 हजार करोड़ रुपये बैंकों का कर्ज बकाया है। इसके लिए आरबीआई द्वारा दी गई 27 अगस्त तक की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो गई है। 28 अगस्त से बैंक कार्यवाही प्रारंभ कर देंगे। कंपनियों का कहना है कि रेलवे और एनटीपीसी से उनको भुगतान नहीं मिल पा रहा है इसलिए बैंक लोन की अदायगी नहीं हो पा रही है। संसदीय कमेटी ने कंपनियों को एनपीए से उबारने के लिए सुझाव दिए हैं जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय की हाईपावर कमेटी विचार कर रही है। तब तक आरबीआई के सकुर्लर पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

आरबीआई के अधिवक्ता का कहना था कि बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट की धारा 35 ए के तहत कार्यवाही करने से कंपनियों को 60 दिन का अतिरिक्त समय मिल जाएगा। सकुर्लर पर रोक लगाना उचित नहीं है क्योंकि लोन अदा न होने से बैंकों की हालत खस्ता है। देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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