त्याग, सेवा के रास्ते पर चलकर देश को बनाया जा सकता है शक्तिशाली
0 संघ की ओर से संगीत समिति और केपी कम्यूनिटी में मनाया गया रक्षा बंधन महोत्सव
इलाहाबाद। स्वामी विवेकानंद से एक बार पूछा गया था कि अगर भारत को शक्तिशाली बनाना है तो क्या करना होगा। इस पर उन्होंने कहा कि त्याग और सेवा के रास्ते पर ही चलकर देश को शक्तिशाली बनाया जा सकता है। यह बातें रविवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे नंद कुमार ने प्रयाग संगीत समिति में संघ के दक्षिण भाग की ओर से आयोजित रक्षाबंधन उत्सव कार्यक्रम में कही।
राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में से एक है। भारत में सबको शुरू से साथ लेकर चलने की परंपरा थी और प्रयाग कुंभ इसका एक जीवंत उदाहरण है। भारत दुनिया को ज्ञान देने और दुनिया से ज्ञान लेने वाला देश है। रक्षा बंधन का पर्व बहुआयामी है। युग और कालखंड के अनुसार इसका आयाम और स्वरूप किंचित-किंचित बदलता रहा। कभी धर्म, राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा करने के लिए तो कभी पारिवारिक जीवन में आत्मीय भाव के जागरण और उसकी वृद्धि के लिए इसे मनाया जाता रहा है। कार्यक्रम में संघ के पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने भगवाध्वज पर प्रतीक के रूप में रक्षा सूत्र भी बांधा। इस अवसर पर संघ के पूर्व विभाग शारीरिक प्रमुख नितिन जायसवाल की स्मृति में प्रयाग महानगर की ओर से आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता के विजेता दल को कार्यक्रम के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम सूरत राम मौर्य द्वारा 45 किलो की हनुमान जी की कांस्य प्रतिमा प्रदान की गई। कार्यक्रम में संघचालक राणा कृष्ण पाल सिंह, भाग संघचालक गोपाल अग्निहोत्री, सह प्रांत प्रचारक मनोज, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, डा. नरेंद्र कुमार सिंह गौर, योगेश शुक्ला, अशोक मेहता, विकास चंद्र त्रिपाठी, शिवकुमार पाल, डा. संजय सिंह, गिरजेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। उधर शाम को केपी कम्यूनिटी संघ के उत्तरी भाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख पराग अभ्यंकर ने कहा कि हमारे सारे त्योहार राष्ट्र की संस्कृति से जुड़े हैं और हमारी पहचान है। दुनिया में ऐसा कहीं भी नहीं है। कार्यक्रम में प्रांत संघ चालक डा. विश्वनाथ लाल निगम, जिला संघ चालक डा. केपी सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।