अधिवक्ताओं ने कचहरी हत्याकांड के मसले पर चल रही पुलिस जांच में सहयोग न करने का फैसला किया है। वकीलों का कहना है कि मामले में सीबीआई जांच शुरू होने वाली है तो पुलिस जांच का क्या औचित्य। अब इसकी जरूरत भी नहीं है। इस बाबत रविवार को कचहरी स्थित जिला अधिवक्ता संघ के सभागार में आयोजित वकीलों की महापंचायत में प्रस्ताव पारित किया गया। यह भी तय हुआ कि सीएम से पुलिस जांच रुकवाने की मांग की जाएगी। महापंचायत में 25 जिलों के जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी शामिल हुए और जो महापंचायत में नहीं पहुंच सके, उन्होंने अपना समर्थन पत्र भेजा। तकरीबन 15 जिलों के अधिवक्ता संघों की ओर से समर्थन पत्र भेजे गए।
पिछले 11 मार्च को कचहरी में वकील नबी अहमद की हत्या को लेकर हुए बवाल के बाद पुलिस ने बड़ी संख्या में वकीलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। प्रदेश सरकार मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर चुकी है और इस बीच कर्नलगंज इंस्पेक्टर की ओर से जांच प्रक्रिया के तहत गवाही के लिए नोटिस भी जारी कर दिया गया है। महापंचायत में वकीलों ने पुलिस जांच का विरोध किया। यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि बार कौंसिल भी पुलिस जांच रुकवाने के लिए प्रयास करे। निर्णय लिया गया कि वकील किसी भी सूरत में पुलिस जांच में सहयोग नहीं करेंगे। इस दौरान डीएम और एसएसपी के तबादले की मांग से जुड़ा मुद्दा भी उठा।
एसएसपी का तो तबादला हो चुका है। वकीलों ने डीएम के तबादले की मांग दोहराई। महापंचायत के दौरान यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि कचहरी हत्याकांड के बाद हुए बवाल के मामले में जिन वकीलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनका मुकदमा बार कौंसिल लड़े। कचहरी हत्याकांड में मृत वकील नबी अहमद के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा दिलाने का प्रस्ताव भी पारित हुआ। वकीलों ने घोषणा की कि जब तक मांगें पूरी नहीं की जातीं, वकील पीछे नहीं हटेंगे। महापंचायत की अध्यक्षता जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र एवं संचालन देवेंद्र मिश्र ‘नगरहा’ ने किया। इस दौरान जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास्तव, उमाशंकर तिवारी सहित अधिवक्ता रेवती रमण त्रिपाठी, अनिल तिवारी, हरिसागर मिश्र आदि मौजूद रहे।