प्रयागराज। पुलिसकर्मी लंबित मामलों में वकीलों से सीधे संपर्क नहीं कर पाएंगे। यूपी सरकार इसके लिए शीघ्र ही दिशा-निर्देश जारी करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जौनपुर में ग्राम सभा की जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दाैरान सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने उक्त आशय का हलफनामा दाखिल किया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ ने की।
जौनपुर निवासी 90 वर्षीय गौरीशंकर सरोज और उनके वकील ने आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने उन्हें याचिका वापस लेने के लिए धमकाया और बाद में पुलिस ने वकील के घर पर छापा भी मारा। यह बातें जब कोर्ट के समक्ष रखी गईं तो कोर्ट ने वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के लिए परेशान करने के चलन को अस्वीकार्य बताया। साथ ही पुलिस से जवाबी हलफनामा तलब किया।
15 जुलाई की सुनवाई के दौरान जौनपुर के पुलिस अधीक्षक ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताया था कि थाना मुंगरा बादशाहपुर के थाना प्रभारी और उपनिरीक्षक इंद्र देव सिंह को उक्त मामले में निलंबित कर दिया गया है। अन्य पुलिसकर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले 12 जुलाई, 2025 को एक जिला-व्यापी आदेश भी जारी किया किया है, जिसमें जौनपुर के सभी पुलिस थानों को निर्देश दिए गए कि वे न्यायालय की अनुमति के बिना मुकदमे से संबंधित स्थानों का दौरा न करें और विचाराधीन मामलों में आवेदक के वकील से सीधे संपर्क न करें। अब राज्य सरकार ने अदालत से सभी जिलों में समान दिशा निर्देश लागू करने के लिए दस दिन का समय मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई, 2025 को निर्धारित की गई है।