फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर वकालत करने के मामले में पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। सिविल लाइंस पुलिस 99 एफआईआर दर्ज होने के बाद पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्री और अंकपत्र के इस खेल के पीछे कहीं कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।
फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर वकालत करने के मामले में पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। सिविल लाइंस पुलिस 99 एफआईआर दर्ज होने के बाद पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्री और अंकपत्र के इस खेल के पीछे कहीं कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। टीम ने दस्तावेज व आरोपियों के बीच कड़ियां तलाशनी शुरू कर दी है।
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बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे रिकॉर्ड और विश्वविद्यालयों की सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। जांच में सामने आया कि फर्जी प्रमाणपत्र के आरोपों से जुड़े अधिवक्ता प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, मथुरा, लखीमपुर खीरी और फतेहपुर समेत कई जिलों के रहने वाले हैं।पुलिस अब यह जांच करेगी कि अलग-अलग अधिवक्ताओं के पास मिले फर्जी अंकपत्र और डिग्री तैयार कराने का तरीका एक जैसा तो नहीं है। ब्यूरो
विश्वविद्यालयों से मांगी जा रही सत्यापन रिपोर्ट
पुलिस बार कौंसिल से मिले रिकॉर्ड के साथ संबंधित विश्वविद्यालयों की सत्यापन रिपोर्ट भी खंगाल रही है। जिस डिग्री या अंकपत्र को फर्जी बताया गया है, उसके मूल रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया की जानकारी जुटाई जा रही है। थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया कि अब जांच इस पहलू पर भी केंद्रित की गई है कि फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने में किसी व्यक्ति या संगठित गिरोह की भूमिका तो नहीं है।