फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj : दूसरी शादी में भूमिका साबित न होने पर ससुरालियों पर द्विविवाह की कार्यवाही रद्द

Thu, 13 Aug 2026 05:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी शादी के मामले में पति के परिजनों को राहत देते हुए कहा कि महज दूसरी शादी की जानकारी होना या सामान्य आरोप लगाए जाना द्विविवाह के अपराध के लिए पर्याप्त नहीं है।
विज्ञापन
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी शादी के मामले में पति के परिजनों को राहत देते हुए कहा कि महज दूसरी शादी की जानकारी होना या सामान्य आरोप लगाए जाना द्विविवाह के अपराध के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने अगस्त 2026 को ससुर, सास और जेठानी के खिलाफ द्विविवाह के मामले में जारी समन आदेश रद्द कर दिए। हालांकि, इटावा निवासी पति राम प्रताप के खिलाफ कार्रवाई बरकरार रखी गई। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने दिया है।

विज्ञापन


शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि उनकी शादी दिसंबर 1991 को राम प्रताप से हुई थी। दहेज की अतिरिक्त मांग, मारपीट और उत्पीड़न के साथ उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च 1997 को पति ने दूसरी शादी करने की जानकारी दी। पुलिस की अंतिम रिपोर्ट के बाद ट्रायल कोर्ट ने पति समेत उसके पिता, मां और जेठानी को विभिन्न धाराओं में समन किया था। इसे हाईकोर्ट चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने कहा कि रिश्तेदारों को धारा 494(द्विविवाह) के तहत आरोपी बनाने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि उन्होंने दूसरी शादी कराने में सक्रिय भूमिका निभाई, उसे बढ़ावा दिया या विवाह संपन्न कराने में मदद की। बयानों में ऐसी कोई विशिष्ट भूमिका सामने नहीं आई। हालांकि, अन्य धाराओं के तहत उनके खिलाफ कार्यवाही जारी रहेगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें