हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में गलत पूछे गए प्रश्नों के अंक ओबीसी अभ्यर्थियों के अंक में जोड़कर दोबारा मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश रद कर दिया है। एकल न्यायपीठ के आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार ने विशेष अपील दाखिल की थी। एकल पीठ ने ओबीसी अभ्यर्थियों को छह गलत पूछे गए प्रश्नों के एवज में 1.25 प्रति प्रश्न अंक देने का निर्देश दिया था। कुल 7.50 अंक देने थे। इसके बाद पूरी मेरिट लिस्ट संशोधित करके पुन: जारी करने का आदेश था। सरकार का कहना था कि इस आदेश का पालन करने से अन्य वर्गों की मेरिट लिस्ट भी प्रभावित हो गई।
अपील पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि अन्य वर्गों की चयन सूची पर कोई आपत्ति नहीं है। मात्र पिछड़ा वर्ग के लिए आदेश दिया गया है जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है। सरकार का पक्ष रख रहे अधिवक्ता पीयूष शुक्ला ने कहा कि पुलिस भर्ती बोर्ड ने गलत प्रश्नों को हटाकर उनके सापेक्ष अंक सही प्रश्नों के साथ जोड़ दिए हैं। इससे किसी भी श्रेणी के अभ्यर्थी को नुकसान नहीं है। मगर ओबीसी की मेरिट दोबारा तैयार करने से अन्य वर्गों के साथ भेदभाव होगा। खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को रद करते हुए कहा कि पुलिस भर्ती बोर्ड की प्रक्रिया दोषपूर्ण नहीं है।