दिल्ली-हावड़ा ट्रैक के बाधित होने के बाद सिविल लाइंस, लीडर रोड और जीरो रोड बस स्टेशन पर भीड़ टूट पड़ी। यात्रियों की भारी भीड़ के आगे रोडवेज भी बेबस नजर आया। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रतापगढ़, मिर्जापुर की बसों को निरस्त कर कानपुर रूट पर रवाना किया गया। सिराथू में घटना स्थल पर यात्रियों को लेकर दो दर्जन से अधिक बसों को भेजा गया। यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रोडवेज ने सैनी बस स्टेशन पर 10 अतिरिक्त बसों की भी व्यवस्था की थी। दो बसें देर रात तक घटनास्थल पर खड़ी थीं।
इलाहाबाद से कानपुर जाने वाली नॉनस्टॉप बसों को भी सैनी बस स्टेशन पर रोका गया। घटना स्थल के समीप पुलिस भी हर बस, यात्री जीप और ट्रकों को रोककर लोगों को कानपुर की ओर रवाना करती। सिविल लाइंस बस स्टेशन पर सर्वाधिक भीड़ रही। जंक्शन पर ट्रेनों के निरस्त या लेट होने की जानकारी मिलने के बाद यात्री बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए थे। कानपुर और आगरा की ओर जाने वाली बसों में तो तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी। खुल्दाबाद के रितेश केसरवानी के दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदार की मौत हो गई थी। उनको हर हाल में दिल्ली पहुंचना था। ट्रेन नहीं मिली तो वह सीधे सिविल लाइंस बस स्टेशन पहुंच गए। उनको सीट नहीं मिली तो वह बस में खड़े-खड़े ही रवाना हुए। ऐसा ही हाल अन्य यात्रियों का भी था।