कॉलेज के पुराने दिनों के अनुशासन और पढ़ाई के स्तर का उन्होंने कई बार बखान किया। 1992 बैच में 12वीं टॉप करने वाले अभिजीत का कहना था कि तब उन्हें स्मृति चिह्न से नवाजा गया था। उन्होंने अपने उन दोस्तों को भी याद किया, जो उन दिनों इसी कॉलेज से पढ़कर निकले और अब देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के बाद बैंक में नौकरी मिल गई, लेकिन मन संगीत में रमा था। इसलिए नौकरी छोड़ दी।
इसी दौरान मुंबई में वर्ष 2005 में उनकी मुलाकात गीतकार नौशाद से हुई। वह रियलिटी शो सारेगामा... में उनके जज रह चुके थे। मुलाकात के दौरान तब नौशाद ने उनसे पूछा था कि बरखुरदार करते क्या हो? किशोर कुमार और रफी के गाने गाकर कब तक जिंदगी बसर करोगे। उन्होंने जवाब दिया कि इसीलिए तो नौकरी छोड़ आया हूं। इस पर नौशाद साहब मुस्कुराकर बोले-तब तो आप कुछ कर जाएंगे।
कार्यक्रम में अभिजीत ने प्रभु श्रीराम के भजन, शिव तांडव स्तोत्र के साथ लता मंगेशकर की पैरोडी से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। उप प्रधानाचार्य डॉ. लालजी यादव ने अभिजीत घोषाल का परिचय दिया। युवा शायर सुशांत चट्टोपाध्याय शफीर ने भी अपनी नज्में प्रस्तुत कीं। अध्यक्षता पीके गांगुली ने की। धन्यवाद ज्ञापन प्रबंधक प्रो. महेश चंद्र चट्टोपाध्याय ने किया। इस मौके पर अवकाश प्राप्त आईएस अफसर बादल चटर्जी, अंकिता मालवीय, आलोक सरकार, डॉ. विनोद मिश्रा , केशव घिल्डियाल, डॉ. सतीश मालिक, वीरेश्वर पाल सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। प्रधानाचार्य अजय कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया।
प्रभु श्रीराम के भजनों का एलबम लांच
अभिजीत निर्मल घोषाल के प्रभु श्रीराम पर आधारित भजनों का एलबम भी शनिवार की दोपहर यूट्यूब चैनल पर लांच हुआ। इस एलबम के भजन को भी उन्होंने सुनाकर तालियां बटोरीं।