प्लास्टिक सर्जरी। सांकेतिक चित्र।
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चेहरे की कमियां दूर करने के लिए युवतियां प्लास्टिक सर्जरी का सहारा ले रही हैं। सिर्फ स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में हर महीने करीब 10 से 15 युवतियां अपनी नाक व होंठ ठीक कराने आती हैं। इनमें खासतौर से वे युवतियां शामिल हैं, जिनकी नाक टेढ़ी व चिपटी होती है।
केस नंबर 1- कौशांबी निवासी 30 वर्षीय एक युवती का होठ बचपन से कटा था और उसकी नाक टेढ़ी थी। जिसके कारण उसकी शादी नहीं हो रही थी। दो माह पहले परिजन उसे एसआरएन अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग लेकर आए। चिकित्सकों ने युवती की राइनोप्लास्टी करके उसे ठीक कर दिया। इस दौरान उसके नाक की हड्डी को अंदर से सीधा किया गया। प्लास्टिक सर्जरी के बाद शादी में आ रही बाधाएं दूर हो गई।
केस नंबर 2- मनौरी निवासी एक 24 वर्षीय युवती की नाक बचपन से चपटी थी। इस कारण वह हीन भावना की शिकार थी। घर से कम ही निकलती थी। दो महीने पहले युवती को प्लास्टिक सर्जरी विभाग लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसके पसली की हड्डी निकालकर नाक में लगा दी। इससे नाक ऊंची हो गई। उसकी नाक सुडौल हो गई।
केस नंबर 3- झूंसी निवासी एक 20 वर्षीय युवती रोबॉक्स डिजीज बीमारी से ग्रसित थी। इस बीमारी से पीड़ित लोगों का आधा चेहरा सूखने लगता है। चेहरा भद्दा हो जाता है। इसी वजह से युवती की शादी नहीं हो रही थी। घर वाले परेशान थे। चिकित्सकों ने युवती के पेट की अतिरिक्त चर्बी को उसके चेहरे पर लगाया। इसे फैट ग्रॉफ्टिंग कहा जाता है। इसके बाद युवती का चेहरा संतुलित हो गया।
जिन लोगों की नाक टेढ़ी व चपटी होती है या फिर कील मुहासे का दाग होता है, इन्हें प्लास्टिक सर्जरी से ठीक किया जाता है। प्लास्टिक सर्जरी कराने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है।
- डॉ. मोहित जैन, प्लास्टिक सर्जन, एसआरएन