संगम की तरफ आने वाले हर रास्ते पर भीड़ दिखी। इससे जाम की स्थित पैदा हो गई थी। सुबह से ही संगम तट पर विसर्जन के लिए लोग पहुंचने लगे थे। दोपहर होते होते संगम सहित सारे घाट भर गए थे। फाफामऊ, दारागंज, बलुआ घाट, दशाश्वमेध घाट, काशीराज घाट, नागवासुकि, छतनाग घाट सहित अरैल घाट पर भी भारी भीड़ दिखी। गंगा सहित ग्रामीण इलाकोंं में यमुना के किनारे भी लोगों ने पिंडदान कर पितरो को विधि विधान से विदा किया। पितृ पक्ष में अमावस्या तिथि नाराज पितरों को खुश करने का अंतिम दिन होता है। क्योंकि पितृ पक्ष में धरती पर आए पितर वापस पितृ लोक जाते हैं।