मामले में याची की ओर से जनहित याचिका दाखिल कर बार कौंसिल ऑफ इंडिया और यूपी बार कौंसिल ऑफ इंडिया को दो बिंदुओं पर निर्देश देने की मांग की गई थी। पहली मांग थी कि जिन केंद्रों पर एआईबीई आयोजित हो रही है, वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और परीक्षा में शामिल होने वालों के यहां तीस दिनों में प्रैक्टिस ऑफ सर्टिफिकेट (प्रैक्टिस प्रमाणपत्र) उनके घर भिजवा दिए जाएं।
कहा गया, एआईबीई हर वर्ष आयोजित की जा रही है, लेकिन इसमें हर वर्ष परेशानी सामने आ रही है। इससे परिणाम रोक दिए जाते हैं। यह तय करने की कोई व्यवस्था नहीं है कि कौन नकल कर रहा था और कौन नहीं। जबकि, कानून के मुताबिक इस व्यवस्था में सुधार की व्यवस्था की गई है।
वहीं विपक्षी की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि परीक्षा में कदाचार को रोकने के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं। याचिका धारणा और अनुमान पर आधारित है। अब तक परीक्षा से कदाचार का कोई मामला सामने नहीं आया। लिहाजा, याचिका खारिज किए जाने योग्य है। कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।