कोर्ट ने कहा कि मामला दो न्यायालयों के क्षेत्राधिकार से जुड़ा हुआ है। निचली अदालतों ने द्वारा दिया गया फैसला सही है। याचिका में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर राजस्थान के अलवर में 28 नवंबर 2018 को आयोजित एक जनसभा में दिए गए भाषण पर आपत्ति जताई गई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ परिवाद दर्ज किए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है। साथ ही कोर्ट ने याची अधिवक्ता पर पांच हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि हर्जाने की रकम तीन दिन में मध्यस्थता केंद्र में जमा करनी होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति समिति गोपाल की पीठ ने मऊ के नवल किशोर मिश्रा की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि मामला दो न्यायालयों के क्षेत्राधिकार से जुड़ा हुआ है। निचली अदालतों ने द्वारा दिया गया फैसला सही है। याचिका में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर राजस्थान के अलवर में 28 नवंबर 2018 को आयोजित एक जनसभा में दिए गए भाषण पर आपत्ति जताई गई थी। याची की ओर से तर्क दिया गया कि उनका यह बयान धार्मिक आस्था और भावना को ठेस पहुंचाने वाला है।
कोर्ट में याचिका दर्ज कर शिकायत दर्ज कराने की मांग की गई। याची ने निचली अदालत में भी याचिका दाखिल कर कार्रवाई की मांग की लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। याचिका पर अधिवक्ता इफ्तखार मोहम्मद फारूकी व राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम ए के सण्ड ने पक्ष रखा था। ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था।