अचानक बालिका के चीखने की आवाज सुनाई दी। लोगों की नजर गई तो देखा कि वह पानी में डूब रही थी। बगल में नहा रहा बालक उसे पकड़ने दौड़ा तो वह भी डूबने लगा। इसी तरह तीसरा बच्चे ने डूब रहे बालक का हाथ पकड़ना चाहा और वह भी गहराई में चला गया। तब तक तीनों बच्चे चीखने लगे थे। यह देख जवान उन्हें बचाने दौड़ा और वह भी गहराई में जाकर डूबने लगा। यह देख घाट पर मौजूद लोग चीखने लगे।
आसपास मौजूद कुछ गोताखोर नदी में कूदे लेकिन जवान व बच्चों का कुछ पता नहीं चला। पुलिस के आने के बाद एसडीआरएफ के जवानों ने करीब घंटे भर बाद पहले जवान व दो बच्चों को बाहर निकाला। लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। कुछ देर बाद बालिका का भी शव मिल गया।
घटना के बाद घाट पर जुटे आरएएफ के सिपाही।
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डीप वाटर बैरिकेडिंग पार करने से हादसा
उधर जल पुलिस का कहना है कि डीप वाटर बैरिकेडिंग की अनदेखी इस हादसे की वजह बनी। मौके पर मौजूद जल पुलिस के कुछ जवानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि फाफामऊ घाट पर डीप वाटर बैरिकेडिंग की गई है। जवान न सिर्फ खुद बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ गया बल्कि तीनों बच्चों को भी बैरिकेडिंग पार करने से नहीं रोका। पानी में जिस जगह बैरिकेडिंग की गई है, उसके आगे की जमीन असमतल व बेहद खतरनाक है।
यही वजह रहा कि गहराई का अंदाजा न लगा पाने के चलते बच्चे व जवान डूब गए। जल पुलिस प्रभारी कड़ेदीन यादव ने बताया कि फाफामऊ घाट पर चार गोताखोरों की स्थायी रूप से तैनाती की गई है। इसके अलावा वहां एक मोटरबोट की भी व्यवस्था रहती है।
पीएसी फ्लड कंपनी की एक टुकड़ी तैनात
उधर लगातार हादसों को देखते हुए बुधवार से फाफामऊ घाट पर पीएसी फ्लड कंपनी की एक टुकड़ी भी तैनात कर दी गई। जल पुलिस प्रभारी ने बताया कि फ्लड कंपनी के जवान दो शिफ्टों ेमें ड्यूटी पर तैनात किए जाएंगे। इससे दुर्घटना की स्थिति में तत्काल राहत व बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा।